
भोपाल। जीवन क्या है और उसका असली उद्देश्य क्या होना चाहिए. यह सवाल जितना गहरा है उतना ही आज के समय में उलझा देने वाला भी. शुक्रवार को राजधानी में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह ने इसी प्रश्न को केंद्र में रखकर संवाद की शुरुआत की गई। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में लेखक सतीश शर्मा की पुस्तक दिल की बात का विमोचन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और ग्वालियर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मनोज शर्मा ने कहा कि जीवन का वास्तविक अर्थ किसी बाहरी दुनिया से नहीं बल्कि हमारे अपने अनुभवों और परिवेश से मिलता है. उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में युवा वर्चुअल दुनिया में तेजी से उलझ रहे हैं. ऐसे समय में पुस्तकें हमारे जीवन में पुल का काम करती हैं. वे हमें खुद से समाज से और मूल्यों से फिर से जोड़ती हैं. दिल्ली से प्रकाशित यह पुस्तक व्यक्तित्व निर्माण आत्मविकास और सकारात्मक दृष्टि जैसे विषयों पर आधारित है. मनोज शर्मा के अनुसार यह पुस्तक जीवन के अनुभवों की वह साझेदारी है जो पाठकों को सोचने की दिशा देती है और बेहतर बनने की प्रेरणा भी.
समारोह में ग्वालियर के विद्वान आचार्य छविराम शास्त्री, पूर्व जिला सहकारी बैंक गुना की अध्यक्ष मुन्नीदेवी शर्मा, प्रिंसिपल गायत्री शर्मा, प्रधान न्यायाधीश पीसी आर्या, वरिष्ठ एडीजी राजाबाबू सिंह और पुलिस तथा प्रशासनिक क्षेत्र के कई अधिकारी मौजूद रहे.
कार्यक्रम में वक्ताओं ने पुस्तक की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे. प्रधान न्यायाधीश पीसी आर्या ने कहा कि न्याय और संतुलन की समझ का आधार पुस्तकों से ही बनता है. उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश की सबसे सच्ची मित्र पुस्तक ही होती है. विमोचन के अंत में लेखक सतीश शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि जीवन से उपजी अनुभूति है. उन्होंने कहा कि दिल की बात आत्ममंथन संवेदनशीलता और सकारात्मक बदलाव की चेतना जगाने का प्रयास है ताकि पाठक अपने जीवन को उद्देश्यपूर्ण और संतुलित तरीके से जी सकें.
