स्वामी विवेकानंद की जयंती पर जानें उनके जीवन का वह मजेदार किस्सा, जिसने उन्हें गुरु रामकृष्ण परमहंस से मिलवाया और कैसे एक मिठाई उनके महान आध्यात्मिक सफर की शुरुआत बनी।
हर साल 12 जनवरी को भारत ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाता है। यह दिन स्वामी विवेकानंद के महान विचारों और उनके अदम्य साहस को समर्पित है, जो आज भी करोड़ों युवाओं के लिए ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। लेकिन उनके ‘नरेंद्र’ से ‘विवेकानंद’ बनने के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी है, जिसका स्वाद इतिहास के पन्नों में आज भी मीठा है- और वह दिलचस्प कहानी जुड़ी है एक “रौशोगुल्ला” से।
स्वामी विवेकानंद, जिन्हें उनके बचपन में नरेंद्र के नाम से जाना जाता था, खाने-पीने की चीजों को लेकर काफी उत्साहित रहते थे। उन्हें “रौशोगुल्ला” (मिठाई) और आइसक्रीम बेहद पसंद थी, यहाँ तक कि वे कड़कड़ाती ठंड में भी आइसक्रीम खाने का मोह नहीं छोड़ पाते थे। उनके और उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस के बीच पहली मुलाकात की वजह भी यही मिठाई बनी।
