
छतरपुर।मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में जन्म प्रमाण-पत्रों को लेकर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। नौगांव जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत महतौल में थोक के भाव जन्म प्रमाण-पत्र जारी किए गए, जिनमें जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। प्रशासन की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पिछले छह महीनों में जारी किए गए 1134 जन्म प्रमाण-पत्रों में से केवल एक ही वैध पाया गया, जबकि शेष 1133 पूरी तरह फर्जी हैं।
हैरानी की बात यह है कि महतौल पंचायत क्षेत्र में मुस्लिम और ईसाई आबादी शून्य है, इसके बावजूद इन समुदायों के नाम पर बड़ी संख्या में जन्म प्रमाण-पत्र बनाए गए। इतना ही नहीं, हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार जैसे अन्य राज्यों के नाम-पते वाले प्रमाण-पत्र भी इसी पंचायत से जारी किए गए।
मामले की शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। जिला पंचायत सीईओ नमःशिवाय अरजरिया ने पंचायत सचिव प्रेमचंद अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही सीएससी संचालक मनोहर कुशवाहा के खिलाफ भी नौगांव थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब इंदौर हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता ने एक वैवाहिक मामले में प्रस्तुत जन्म प्रमाण-पत्र की सत्यता पर सवाल उठाए। जांच में प्रमाण-पत्र छतरपुर के महतौल पंचायत से जारी पाया गया, जिसके बाद पूरे प्रकरण की परतें खुलती चली गईं।
छतरपुर एसपी अगम जैन ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और विस्तृत जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी प्रमाण-पत्रों का उपयोग किन-किन उद्देश्यों के लिए किया गया।
