उफ़ ये कैसा स्वच्छ शहर का दावा: वाटर ऑडिट में इंदौर का पानी निकला गंदा

भोपाल। जल-प्रदूषण की गंभीर घटना के बाद इंदौर में कराए गए वाटर ऑडिट के निष्कर्ष गुरुवार को सामने आए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इन निष्कर्षों को सार्वजनिक करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के “स्वच्छता” और “विकसित भारत” के दावे ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।

उमंग सिंघार ने कहा कि भगीरथपुरा से लेकर इंदौर के कई गरीब, श्रमिक और मेहनतकश इलाकों में नलों से बदबूदार, गंदा और सीवेज मिश्रित पानी की आपूर्ति हो रही है। इससे स्पष्ट है कि यह संकट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे शहरी प्रशासन की प्रणालीगत असफलता का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगीरथपुरा में अब तक करीब 20 लोगों की जान जा चुकी है और प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में जाने से रोकने के प्रयास भी किए।

उन्होंने बताया कि 7 जनवरी को मदीना नगर, खजराना, भूरी टेकरी, कृष्णा बाग, बर्फानी धाम और कनाडिया क्षेत्रों में किए गए वाटर ऑडिट के दौरान पानी अत्यधिक दूषित पाया गया। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, दूषित पानी के सेवन से उल्टी, दस्त और अन्य गंभीर बीमारियां फैल रही हैं।

इंदौर को लगातार “सबसे स्वच्छ शहर” घोषित किए जाने पर सवाल उठाते हुए सिंघार ने कहा कि हजारों करोड़ रुपये के नगर निगम बजट के बावजूद नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रदेश में वाटर ऑडिट कराया जाए, दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर एफआईआर दर्ज हो तथा सख्त जवाबदेही तय की जाए। सिंघार ने स्पष्ट किया कि जब तक जनता को साफ पानी और न्याय नहीं मिलेगा, तब तक विपक्ष इस मुद्दे को सड़क से सदन तक पूरी ताकत से उठाता रहेगा।

Next Post

​सौसर के बोरगांव औद्योगिक क्षेत्र में हादसा: केजेवी कंपनी में ऊंचाई से गिरा मजदूर, हालत गंभीर

Thu Jan 8 , 2026
सौसर। सौसर के बोरगांव औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कंपनियों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार को क्षेत्र की केजेवी कंपनी में एक बड़ा हादसा सामने आया, जहाँ सोलर पैनल की सफाई के दौरान एक मजदूर ऊंचाई से नीचे […]

You May Like