राहुल गांधी की नागरिकता विवाद पर लखनऊ कोर्ट में तीखी बहस, याचिकाकर्ता का दावा- ‘रॉल विंची’ ही राहुल हैं, ब्रिटिश नागरिकता के सबूत पेश

नई दिल्ली/लखनऊ | 08 जनवरी, 2026: लखनऊ की विशेष एमपी-एलएलए अदालत में मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े मामले में अहम सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ऐस विग्नेश शिशिर ने करीब दो घंटे तक अपनी दलीलें पेश कीं और कोर्ट के समक्ष कई विदेशी दस्तावेज व ईमेल साक्ष्य के तौर पर रखे। याचिकाकर्ता का सीधा आरोप है कि राहुल गांधी ही ‘रॉल विंची’ के नाम से ब्रिटिश नागरिकता धारक हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह संवेदनशील मामला रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित किया गया है, जहाँ अब राहुल गांधी के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की जा रही है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उनके पास ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद हैं जो दोहरी नागरिकता की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े सीलबंद दस्तावेजों को उचित प्रक्रिया और अनुमति मिलने के बाद ही रिकॉर्ड पर लिया जाएगा। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है। केंद्र सरकार और ब्रिटिश अधिकारियों से इस संबंध में पूर्व में जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अभी तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर नागरिकता की पुष्टि नहीं की है।

भारतीय संविधान के अनुसार, भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है। यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश पासपोर्ट है, तो वे भारत में चुनाव लड़ने या सार्वजनिक पद पर रहने के पात्र नहीं हैं। अदालत अब इन दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच कर रही है। मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या इन दलीलों के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जा सकती है या नहीं।

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