नई दिल्ली | 08 जनवरी, 2026: फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) की एक हालिया पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एमबीबीएस के बाद नीट-पीजी की तैयारी करने वाले छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों में नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। अध्ययन के अनुसार, अस्पतालों में काम का कोई निश्चित समय न होने और मानसिक थकान के कारण डॉक्टर ‘दिमागी आराम’ के लिए नशे की शरण ले रहे हैं, जो धीरे-धीरे एक गंभीर लत में बदल रही है। इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए फेमा ने एक विशेष मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन शुरू की है, जिसका उद्देश्य पीड़ित डॉक्टरों को इस दलदल से बाहर निकालना है।फेमा द्वारा संचालित 24 घंटे की इस हेल्पलाइन सेवा के अब तक सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। संस्था के मुताबिक, अब तक देश भर के 300 से अधिक डॉक्टरों की काउंसलिंग की जा चुकी है, जिनमें न केवल जूनियर बल्कि कई वरिष्ठ डॉक्टर भी शामिल हैं। फेमा के समन्वयक डॉ. सजल बंसल ने बताया कि डॉक्टर होने के नाते कई लोग अपनी समस्या खुलकर बताने में हिचकिचाते हैं, लेकिन इस हेल्पलाइन पर पहचान गोपनीय रखे जाने की सुविधा के कारण वे अब मदद मांग रहे हैं। नागपुर जैसे उभरते मेडिकल हब में भी बड़ी संख्या में इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर वर्कलोड के कारण इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि अत्यधिक कार्यभार के कारण डॉक्टरों का सोशल लाइफ और पारिवारिक तालमेल बिगड़ रहा है। नींद की कमी और करियर का दबाव उन्हें अवसाद की ओर धकेल रहा है, जिससे वे नशे के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। फेमा का कहना है कि यदि समय रहते इन मेडिकल प्रोफेशनल्स की काउंसलिंग नहीं की गई, तो यह उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ चिकित्सा व्यवस्था के लिए भी घातक सिद्ध होगा। एसोसिएशन ने अब अपनी हेल्पलाइन को नशामुक्ति अभियान से पूरी तरह जोड़ दिया है ताकि डॉक्टरों को एक सुरक्षित और स्वस्थ कार्य वातावरण मिल सके।

