पिछले मैच में शून्य पर आउट होने के बाद वैभव सूर्यवंशी ने जयपुर में करारा जवाब दिया। प्रफुल्ल हिंगे के पहले ही ओवर में 4 छक्के जड़कर उन्होंने हिसाब बराबर कर दिया।
आईपीएल में खिलाड़ियों के बीच जुबानी जंग आम बात है, लेकिन जब कोई युवा खिलाड़ी अपने अपमान का जवाब बल्ले से देता है, तो वह कहानी खास बन जाती है। राजस्थान रॉयल्स के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ पिछले मैच में शून्य पर आउट होने के बाद उन्हें गेंदबाज प्रफुल्ल हिंगे के कमेंट्स का सामना करना पड़ा। लेकिन वैभव ने कोई बयानबाजी नहीं की और जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में अपने प्रदर्शन से ही जवाब दिया।
पिछली बार का दर्द किया साझा
पिछले मुकाबले में हिंगे की शॉर्ट पिच गेंद पर वैभव पुल शॉट खेलने के प्रयास में आउट हो गए थे। यह उनके लिए निराशाजनक पल था, लेकिन मैच के बाद आए कमेंट्स ने उन्हें और ज्यादा प्रेरित कर दिया। वैभव ने राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर रोमी भिंडर इस बारे में कहा- ‘पिछली बार आउट होने के बाद जब मैंने अपना फोन चेक किया, तो मैंने बहुत कुछ देखा। आमतौर पर मैं इन चीजों पर ध्यान नहीं देता, लेकिन जब कोई व्यक्तिगत रूप से कुछ कहता है, तो वह मुझे थोड़ा प्रभावित करता है। मैंने वहीं तय कर लिया था कि अगली बार जवाब बल्ले से ही दूंगा।’
जयपुर में दिखा वैभव का जलवा
करीब 12 दिन बाद जब दोनों टीमें जयपुर में आमने-सामने आईं, तो सबकी नजरें इसी टक्कर पर थीं। वैभव पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे थे। उन्हें अंदाजा था कि हिंगे फिर से शॉर्ट गेंदों का इस्तेमाल करेंगे। जैसे ही हिंगे ने पहला ओवर डाला, वैभव ने आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने लगातार चार गेंदों पर चार छक्के जड़कर मैच का रुख बदल दिया। इस आक्रमण ने न सिर्फ हिंगे को दबाव में ला दिया, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी हिला दिया।
36 गेंदों में ठोका धमाकेदार शतक
प्रफुल्ल हिंगे के खिलाफ मिली शानदार शुरुआत के बाद वैभव ने अपनी रफ्तार बरकरार रखी। उन्होंने मैदान के चारों ओर शानदार शॉट्स खेले और महज 36 गेंदों में शतक पूरा कर लिया। यह आईपीएल इतिहास के सबसे तेज शतकों में से एक है। इससे पहले भी वैभव ने 2025 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ 35 गेंदों में शतक लगाकर अपनी काबिलियत साबित की थी।
यह पारी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह वैभव सूर्यवंशी के आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती का उदाहरण भी थी। जब एक युवा खिलाड़ी पर दबाव होता है, तो वह अक्सर बिखर सकता है, लेकिन वैभव ने अपनी एकाग्रता बनाए रखी। उन्होंने साबित कर दिया कि वह आलोचनाओं से टूटने वाले नहीं, बल्कि उनसे और मजबूत बनने वाले खिलाड़ी हैं।
