नयी दिल्ली, 27 जून (वार्ता) दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर गुरुवार को कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की सतत रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्री गुप्ता ने आज बताया कि दिल्ली विधानसभा में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा,“ यह संगोष्ठी न केवल आपातकाल का विरोध करने वाले लोकतंत्र के प्रहरीजनों को श्रद्धांजलि है, बल्कि नयी पीढ़ी को यह स्मरण कराने का संकल्प भी है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की सतत रक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
दिल्ली विधान सभा आपातकाल (1975–77) की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर कल एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन करने जा रही है। यह संगोष्ठी “भारतीय लोकतंत्र और संविधान का सबसे अंधकारमय दौर: ना भूलें, ना क्षमा करें” शीर्षक के अंतर्गत हैशटैग संविधानहत्यादिवस के रूप में मनाई जाएगी। यह आयोजन विधान सभा परिसर में किया जाएगा।
यह संगोष्ठी भारतीय लोकतंत्र के सबसे संकटपूर्ण और तानाशाही दौर की स्मृति में एक राष्ट्रीय आत्मचिंतन का अवसर होगी। इसका उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, नागरिक स्वतंत्रताओं के संरक्षण और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की अनिवार्यता को पुनः रेखांकित करना है।
इसमें देशभर से प्रतिष्ठित विद्वानों, संविधान विशेषज्ञों,अधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों ,नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और आपातकाल के साक्षी रहे व्यक्तियों की सहभागिता होगी। इस अवसर पर “आपातकाल@50” बुकलेट का विमोचन भी किया जाएगा, जो इस ऐतिहासिक घटना से जुड़े तथ्यों, अनुभवों एवं साक्ष्यों को रेखांकित करती है।

