विश्व पुस्तक मेला के छठे दिन रीडिंग इंडिया संवाद और सेना दिवस रहा मुख्य आकर्षण

नयी दिल्ली, 15 जनवरी (वार्ता) विश्व पुस्तक मेला के छठे दिन गुरुवार को राष्ट्रीय पठन संस्कृति के निर्माण से लेकर सैन्य शौर्य और बलिदान को नमन करने, विचार, इतिहास और राष्ट्रबोध का सार्थक संगम देखने को मिला।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे पुस्तक मेला में “रीडिंग इंडिया संवाद 2026” का शुभारंभ और सेना दिवस के अवसर पर विशेष सत्र प्रमुख आकर्षण रहे।

दो दिवसीय रीडिंग इंडिया संवाद का नेतृत्व शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (एनबीटी) द्वारा किया गया है। संवाद का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप भारत में पठन संस्कृति, पुस्तकालयों और ज्ञान तक पहुंच के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

इस संवाद का उद्घाटन शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने किया। इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी, शिक्षा मंत्रालय की अपर सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक और एनबीटी के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक कुमार विक्रम उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में श्री मलिक ने कहा कि पठन किसी भी प्रगतिशील समाज की नींव है। उन्होंने सिकंदर, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और नेपोलियन बोनापार्ट जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के उदाहरण देते हुए बताया कि पुस्तकों ने उनके व्यक्तित्व निर्माण और नेतृत्व क्षमता को आकार दिया। उन्होंने कहा कि पठन न केवल ज्ञान देता है, बल्कि सोचने, सवाल करने और जिज्ञासा पैदा करने की शक्ति भी देता है।

श्री कुमार ने कहा कि पुस्तकों से भरी दीवार से अधिक सुंदर कुछ नहीं होता। उन्होंने युवाओं और नागरिकों से आने वाले 20 वर्षों के भारत की कल्पना करने का आह्वान भी किया।

अर्चना शर्मा अवस्थी ने अपने बचपन की स्मृतियाँ साझा करते हुए पुस्तक मेले में बिताए गए दिनों को याद किया और कहा कि पठन संस्कार विकसित करने में माता-पिता और साहित्य शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं राजशेखर जोशी ने पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उन्हें तकनीक और व्यक्तिगत पठन मार्गों से समर्थित जीवंत ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रीडिंग इंडिया संवाद के पहले दिन ‘पाठ्यपुस्तकों से पठन संस्कृति तक: कक्षा की पुनर्कल्पना’ और ‘पुस्तकालय सीखने के केंद्र के रूप में: पठन स्थलों का पुनः अधिग्रहण’ विषय पर दो दो महत्वपूर्ण समूह चर्चा आयोजित की गयी।

इन चर्चाओं में एमसीडी के शिक्षा निदेशक निखिल तिवारी, यूनिसेफ इंडिया के दानिश अज़ीज़, टाटा ट्रस्ट्स की मौलश्री कलोथिया, प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की श्वेता भुटाडा, इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राय, एमिटी विश्वविद्यालय की प्रो. (डॉ.) सुनीता रतन और स्कॉलास्टिक इंडिया के श्री नीरज जैन ने अपने विचार साझा किए।

थीम पवेलियन में सेना दिवस के अवसर पर आयोजित सत्रों में भारतीय सेना के शौर्य, नेतृत्व और बलिदान को श्रद्धांजलि दी गई। एक विशेष पैनल में परमवीर चक्र से सम्मानित पहले जीवित सैनिक मेजर राम राघोबा राणे के जीवन और योगदान पर चर्चा हुई। इस सत्र में डॉ. डीवी गुरुप्रसाद और लेफ्टिनेंट कर्नल अन्नप्पा नारायण शेट ने उनके अनुशासन, साहस और 1947–48 के संघर्ष के दौरान दिखाए गए अद्वितीय पराक्रम पर प्रकाश डाला।

कारगिल युद्ध 1999 पर आधारित ऑपरेशन विजय सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल मोहिन्द्र पुरी, ब्रिगेडियर ओम प्रकाश यादव और कर्नल एससी त्यागी ने अपने अनुभव साझा किए। दुर्गम परिस्थितियों, खराब मौसम और शत्रु की गोलाबारी के बीच सैनिकों की रणनीति और साहस को विस्तार से बताया गया।

अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में ‘समकालीन साहित्य और ईरान–भारत के साझा सांस्कृतिक पक्ष’ विषय पर आयोजित सत्र में डॉ. मोहम्मद फतेहली, डॉ. ग़ह्रेमान सुलेमानी और डॉ. सैयद अख़्तर हुसैन काज़मी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक साहित्यिक संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने फ़ारसी भाषा को भारत–ईरान संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए पंचतंत्र के फ़ारसी अनुवाद कलीला वा दिम्ना का उल्लेख किया।

बाल मंडप में कहानी सत्र, वैदिक गणित, कठपुतली शो, बाल लेखक सम्मेलन और बाल फिल्मों की स्क्रीनिंग ने बच्चों को आकर्षित किया। एम्फीथिएटर में रूसी लोक संस्कृति की प्रस्तुति और लोक-फ्यूज़न बैंड रहस्य : द प्रोजेक्ट की संगीतमय प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

 

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