नई दिल्ली | 08 जनवरी, 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का शुभारंभ करते हुए सोमनाथ मंदिर के 1,000 वर्षों के संघर्ष और पुनरुत्थान को याद किया। सोशल मीडिया के माध्यम से देश को संबोधित करते हुए पीएम ने बताया कि जनवरी 1026 में सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण ने भारत की आस्था को चुनौती दी थी, लेकिन पिछले एक हजार वर्षों में हुए अनगिनत हमलों के बावजूद हमलावर देश की शाश्वत चेतना को नहीं तोड़ सके। उन्होंने कहा कि यह मंदिर बार-बार खड़ा होकर राष्ट्र की एकता और अडिग सिद्धांतों का प्रतीक बना है। इसी गौरवशाली इतिहास के उपलक्ष्य में 8 से 11 जनवरी तक भव्य स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उन महान सपूतों को नमन किया जिन्होंने मंदिर के आधुनिक पुनरुद्धार में मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और के.एम. मुंशी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि उनके दृढ़ संकल्प के कारण ही 1951 में मंदिर का वर्तमान भव्य स्वरूप अस्तित्व में आया। वर्ष 2026 इस आधुनिक उद्घाटन की 75वीं वर्षगांठ का अवसर है। पीएम ने 2001 की अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि तब वे अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की उपस्थिति में स्वर्ण जयंती समारोह का हिस्सा बने थे, और अब ‘अमृत काल’ में इसे और भी भव्यता से मनाया जा रहा है।
11 जनवरी को आयोजित होने वाले मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री स्वयं भी शामिल होंगे। उन्होंने दुनिया भर में फैले शिव भक्तों और पर्यटकों से भावुक अपील की है कि वे अपनी सोमनाथ यात्रा की पुरानी यादें और तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv हैशटैग के साथ सोशल मीडिया पर साझा करें। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है जो हमें राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है। प्रशासन ने इस चार दिवसीय उत्सव के लिए सोमनाथ मंदिर परिसर को दुल्हन की तरह सजाया है।

