
इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैल रही बीमारी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हालात अब भी काबू में आते नजर नहीं आ रहे. अब तक 10 हजार से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच और करीब ढाई हजार घरों का सर्वे किया जा चुका है, इसके बावजूद क्षेत्र में नए मरीज लगातार सामने आ रहे हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक बीमारी की असली वजह बने पानी के लिकेज का स्पष्ट पता नहीं लगाया जा सका है.
हाल ही में कुछ लोगों ने गुईलेन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) जैसी गंभीर बीमारी के मरीज मिलने की खबर प्रकाशित हुई थी, लेकिन इंदौर में जीबीएस का कोई भी मरीज नहीं पाया है. इस दावे की पुष्टि कोलकत्ता से आई आईसीएमआर टीम और अन्य विशेषज्ञों ने भी की है. वैज्ञानिकों ने जीबीएस से संबंधित खबरों को गलत बताया है. भागीरथपुरा में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोलकत्ता, दिल्ली और भोपाल से आई विशेषज्ञ टीमों, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों द्वारा लगातार पानी की जांच की जा रही है.
क्षेत्र की सभी बोरिंगों की टेस्टिंग के साथ साथ अब घरों में बने हौज यानी पानी की टंकियों की सफाई और क्लोरिनेशन भी शुरू कर दिया है. फिलहाल निगम के टैंकरों से ही पीने का पानी सप्लाई किया जा रहा है. हालांकि नगर निगम ने अब तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि आखिर किस तरह के लिकेज वाला पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े.
गैर आधिकारिक रूप से अब तक 17 मौतों की खबरें सामने आ चुकी हैं, जबकि प्रशासन सिर्फ 5 मौतों की ही पुष्टि कर रहा है, जिससे स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. इधर, स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ आयुष विभाग भी सक्रिय हुआ है. क्षेत्र में आयुर्वेदिक दवाइयों का वितरण शुरू कर दिया है. शासकीय अष्टांग आयुर्वेदिक कॉलेज के चिकित्सकों द्वारा शिविर लगाकर लोगों को औषधियां दी जा रही हैं.
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि पानी की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. भागीरथपुरा क्षेत्र की सभी बोरिंगों का क्लोरिनेशन किया जाएगा और बेसमेंट में बने हौज को साफ कर क्लोरिनेट करने के बाद ही नागरिकों को बोरिंग का पानी उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी. नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें. इसके लिए पूरे क्षेत्र को 30 से अधिक बीटों में विभाजित किया गया है.
स संबंध में हुई समीक्षा बैठक में अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार, कोलकत्ता से आई टीम के वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष, डॉ. गौतम चौधरी, दिल्ली के एनसीडीसी के डॉ. अनुभव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी, डॉ. अश्विन भागवत, डॉ. अभिजीत प्रकार, डॉ. सविता अखण्ड, डॉ. सैलविया, शैलेर्न कुमार, डॉ. अंशुल मिश्रा, डॉ. रूपामी जोशी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे. प्रशासनिक कवायद तेज होने के बावजूद क्षेत्र में बीमारी का सिलसिला पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा, जिससे भागीरथपुरा के हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं
