सतना : देश के सबसे अधिक स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पेयजल का उपभोग करने के चलते दर्जन भर से अधिक लोगों की मौत जैसी गंभीर घटना सामने आने के बाद अन्य स्थानों पर टैप वॉटर की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. इसी कड़ी में सतना नगर निगम क्षेत्र के कई रहवासियों द्वारा भी उनके घरों में पहुंचने वाले पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की जाती रही है. लेकिन लोगों के घरों तक पहुंचने वाले पेयजल की गुणवत्ता की जमीनी स्तर पर जांच किए बिना ही केवल फिल्टर प्लांट के जल की शुद्धता का प्रचार-प्रसार ही जोर पकड़ता दिखाई दे रहा है.
लगभग साढ़े 3 लाख की जनसंख्या वाले सतना नगर निगम क्षेत्र में 40 हजार से कुछ अधिक वैध नल कनेक्शन हैं. शहर में आमजन के घरों तक पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पहले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पास थी. लेकिन कुंभ काल के थोड़ा पहले यह जिम्मेदारी नगर निगम को सौंप दी गई. शहर के पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी नगर निगम को मिलने के कुछ समय बाद ही केंद्र सरकार द्वारा अमृत मिशन योजना आरंभ की गई. जिसके बाद स्मार्ट सिटी में सम्मिलित होने के बाद सतना शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए होने वाली फंडिंग की राशि कई गुना अधिक बढ़ गई.
नतीजतन नगरवासियों के घरों में 24 घंटे जलापूर्ति का दावा करते हुए शहर में नए सिरे से पाइप लाइन बिछई गई. इसी कड़ी में एनीकट से लेकर फिल्टर प्लांट तक की ढांचागत व्यवस्था में आमूलूचल परिवर्तन का दावा किया जाने लगा. इतना ही नहीं बल्कि शहर भर में 2 दर्जन पानी की टंकियों का जाल भी बिछ गया. इन तमाम दावों के बीच आम उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाले जलकर में 10 गुना से अधिक की बढ़ोत्तरी भी कर दी गई.
नगर वासियों ने इस नई व्यवस्था को यह सोचकर हंसते-हंसते अंगीकार कर लिया कि उनके घरों में पानी की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा. लेकिन हुआ उसका उल्टा, एक ओर जहां दावों का प्रचार-प्रसार दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ता रहा. लेकिन वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत में कहीं से किसी तरह की गुंजाइश के संकेत सामने नहीं आए. लोगों के घरों में 24 घंटे जलापूर्ति का दावा घंटे भर से ऊपर नहीं पहुंच सका.
वहीं नई पाइपलाइन का संजाल बिछने के बावजूद भी लोगों के घरों में कभी मिट्टी युक्त पानी तो कभी पानी में कीड़े तैरते नजर आए. रहवासियों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद कुछ स्थानों पर ननि की पेयजल शाखा का अमला कुछ समय के लिए सक्रिय तो हुआ. लेकिन समस्या जस की तस बनी रही. आलम यह है कि घरों में गंदा पानी पहुंचने की शिकायत वार्ड के रहवासियों द्वारा ननि के जिम्मेदारों से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक में कर डाली. लेकिन उन्हें अब भी अपनी समस्या के समाधान का इंतजार ही करना पड़ रहा है.
निर्देश बार-बार हुए बेअसर
महापौर की जिम्मेदारी संभालने के बाद महापौर योगेश ताम्रकार द्वारा इस बात पर जोर दिया कि लोगों के घरों में पहुंचने वाले पेयजल की गुणवत्ता ही असली कसौटी है. इसे लेकर महापौर द्वारा कई बार पेयजल प्रभारी सहित मातहत अमले को निर्देश भी दिए गए. लेकिन निर्देशों पर कोई अमल होता न देख सिंतबर 2024 में आयोजित एमआईसी की बैठक में महापौर द्वारा पेयजल प्रभारी सहित अमले को इस बात की स्पष्ट ताकीद की गई कि प्रत्येक वार्ड में उच्च स्तरीय टंकियों के साथ-साथ कम से कम 5-5 उपभोक्त्ताओं के घरों से पेयजल का नमूना लेकर उसका प्रयोगशाला में परीक्षण कराया जाए.
इसी कड़ी में पाइल लाइन की नियमित जांच करते हुए उन्हें दुरुस्त कराया जाए. गौरतलब है कि महापौर द्वारा दी गई इस सख्त ताकीद को डेढ़ वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है. लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम होता न देख उन्हें एमआईसी सदस्यों के साथ महज फिल्टर प्लांट के पेयजल की गुणवत्ता का प्रचार-प्रसार तक सीमित रहने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है. तस्वीरें देखकर नगरवासी भी सवाल खड़े कर रहे हैं कि उनके घरों में पहुंचने वाली पानी की जांच कब होगी.
गुम हो गई अमृत मित्र योजना
डेढ़ वर्ष पहले ही डे-एनएलयूएम योजना के अंतर्गत अमृत मित्र महिला स्वसहायता समूहों द्वारा शहर के सभी वार्डों में जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य आरंभ हुआ था. जिसके अंतर्गत एक ओर जहां पोर्टेबल वाटर टेस्टिंग किट के माध्यम से मौके पर ही घरेलू नल के जल की गुणवत्ता का परीक्षण करना था. वहीं दूसरी ओर घरेलू टैप वाटर का सैंपल एकत्र कर उसकी परीक्षण प्रयोगशाला में करया जाना था.
दावा किश गया कि एनएलयूएम के 6 समूहों द्वारा शहर के 45 वार्डों से 500 से अधिक सैंपल लिए गए. लेकिन घरेलू नल के पानी की जांच की जमीनी हकीकत का अंदाजा उपभोक्ताओं द्वारा लगातार गंदे पानी की शिकायतों के जरिए आसानी से की जा सकती है. इस मामले में ननि के पेयजल प्रभारी रोजल प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि शहर के हर पानी की टंकी का प्रतिदिन नमूना लिया जाता है. वहीं उपभोक्ता के घर से नमूने लिए जाने का काम साप्ताहिक होता है. लेकिन ननि के पेयजल प्रभारी के दावे को यदि सही माना जाए तो इतने लंबे समयांतराल तक शहर के 40 हजार कनेक्शनों की जांच पूरी हो जानी चाहिए थी. लिहाजा घरेलू टैप वाटर की जांच-निगरानी व्यवस्था किस हाल में है यह किसी से छिपा नहीं है.
