उज्जैन: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में नववर्ष 2026 की शुरुआत विकास की नई इबारत के साथ हुई है. सिंहस्थ 2028 को केंद्र में रखते हुए उज्जैन में करीब 10 हजार से अधिक विकास और निर्माण कार्यों के टेंडर विभिन्न शासकीय एजेंसियों द्वारा जारी किए गए हैं.ये 10 हजार टेंडर आने वाले वर्षों में शहर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने वाले हैं. ये टेंडर न सिर्फ बुनियादी स्थानीय सुविधाओं को मजबूत करेंगे, बल्कि सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान अनुमानित 30 करोड़ श्रद्धालुओं और साधु-संतों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की नींव भी तैयार करेंगे. महाकालेश्वर मंदिर, विकास प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन, नगर निगम, सेतु विकास निगम, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग ,वन विभाग, हाउसिंग बोर्ड, प्रदूषण विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग, कृषि विभाग मध्य प्रदेश विद्युत मंडल से लेकर आने को सरकारी विभागों के टेंडर जारी हुए हैं.
सभी 54 वार्डो में करोड़ो के काम
उज्जैन नगर निगम सहित विभिन्न शासकीय विभागों, स्थानीय निकायों और निर्माण एजेंसियों द्वारा शहर के 54 वार्डों में व्यापक स्तर पर विकास कार्य प्रस्तावित किए गए हैं. इनमें सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण, पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ट्यूबवेल और पाइपलाइन बिछाने के कार्य, जल निकासी के लिए नालों का निर्माण, शासकीय भवनों और मर्टरों की मरम्मत, सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार, मंदिरों का जीर्णोद्धार और जनहित से जुड़े अनेक कार्य शामिल हैं. इन टेंडरों के माध्यम से देश की नामी-गिरामी और अनुभवी निर्माण कंपनियों को उज्जैन में गुणवत्तापूर्ण, टिकाऊ और दीर्घकालिक कार्यों के लिए आमंत्रित किया गया है.
सुबह 6 बजे निकल पड़ते अफसर रात को 2 बजे पहुंचते
सिंहस्थ 2028 की तैयारी को लेकर पूरा प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है. सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, आईजी उमेश जोगा और एसपी प्रदीप शर्मा सहित तमाम अधिकारी अलग-अलग प्रकल्पों की सतत समीक्षा कर रहे हैं. रूटिंन प्लान, यातायात व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, जनसुनवाई, निरीक्षण दौरे और नियमित बैठकों के अलावा प्रशासन सुबह 5 बजे से लेकर देर रात 2 बजे तक एक्टिव मोड में रहकर सिंहस्थ की तैयारियों को गति दे रहा है.
संतों के आश्रमों में होंगे काम
अखाड़ों में होने वाले स्थायी और अस्थायी निर्माण कार्यों के लिए संत समाज द्वारा मांग पत्र भी भेजे जा चुके हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अखाड़ों और संतों को आवश्यक राशि उपलब्ध कराए जाने की योजना है, ताकि सिंहस्थ के दौरान साधु-संतों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
स्थानीय और बाहरी जनता को लाभ
कुल मिलाकर, वर्ष 2026 उज्जैन के लिए निर्णायक साबित होने जा रहा है. हजारों टेंडरों के माध्यम से होने वाले बड़े निर्माण कार्य न केवल सिंहस्थ 2028 को सुव्यवस्थित और भव्य बनाएंगे, बल्कि लंबे समय तक शहर की स्थानीय जनता को भी इसका लाभ मिलेगा. बेहतर सड़कें, मजबूत पेयजल व्यवस्था, सुधरी हुई नागरिक सुविधाएं और धार्मिक स्थलों का संरक्षण उज्जैन को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करेगा. इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी.
विकास और आस्था के इस संगम के साथ उज्जैन, सिंहस्थ 2028 की ओर तेज़ी से अग्रसर है
