सांसद खेल महोत्सव से खिलाड़ियों का मोह भंग क्यों….?

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

फिट इंडिया एवं खेलो इंडिया की राष्टीय संकल्पना को धरातल पर साकर करने और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे द्वारा कही गई जबलपुर से अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के बाहर निकलने की बातों के साथ 3 दिवसीय सांसद खेल महोत्सव रानीताल ग्राउंड में संपन्न तो हो गया लेकिन ये आयोजन अपने पीछे खिलाड़ियों की कसक छोड़ गया। नतीजा ये हुआ कि सोशल मीडिया में सांसद खेल महोत्सव में विजयी खिलाड़ियों ने वीडियो अपलोड कर अपनी व्यथा सुनाई और आरोप लगाए कि आयोजन के पहले विजेता खिलाड़ियों व टीम को 21 हजार रुपए की इनामी राशि, प्रमाण पत्र व मैडल दिए जाएंगे लेकिन समापन के बाद विजयी खिलाड़ियों को 300, 500 और 1 हजार रुपए के लिफाफे पकड़ा दिए गए जिसके बाद खिलाड़ियों का आक्रोश भड़क उठा और उन्होंने जिला खेल अधिकारी आशीष पांडे को ये लिफाफे, मैडल व प्रमाण पत्र वापस कर दिए।

मामला यहीं तक थमने वाला नहीं था खिलाड़ियों की मानें तो जिला खेल अधिकारी ने उनसे ये तक कह दिया कि जो मिला है उसे रख लो नहीं तो उन सभी का खेल कैरियर बर्बाद कर दूंगा। इस धमकी के बाद खिलाड़ियों का समूह भयभीत हो गया और फिर यही समूह सपोर्ट मांगने सोशल मीडिया का सहारा लेने लगा। मामले में जिला खेल अधिकारी आशीष पांडे ने यह कहकर विराम लगा दिया कि खिलाड़ियों को इनाम की राशि को लेकर भ्रम हुआ था। अपने साथ हुई ठगी के बाद विजयी खिलाड़ियों ने ये तो स्पष्ट कह दिया कि अब जबलपुर में दोबारा सांसद खेल महोत्सव हुआ तो वह इस आयोजन में शिरकत नहीं करेंगे। हैरानी तब भी हुई जब सांसद आशीष दुबे ने मामला उठने के बाद जांच के निर्देश तो दिए लेकिन कई दिन गुजर जाने के बाद ये जांच कहां अटक गई, इसका कोई सुराग सामने नहीं आया, जिस पर खिलाड़ियों ने सांसद के बारे में कह दिया कि सांसद महोदय ये चुप्पी आपकी ठीक नहीं है।

कागजों में 14, हकीकत में कुछ और…

जबलपुर के जिला अस्पताल विक्टोरिया में स्वास्थ्य व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बर्फानी सिक्योरिटी सर्विसेस ने ऐसा कारनामा किया जिसने अस्पताल प्रबंधन की साख पर बट्टा लगा दिया। साख इसलिए भी खराब हुई क्योंकि अस्पताल प्रबंधन ठेका कंपनी का भ्रष्टाचार सामने आने के बाद भी उसकी तरफदारी करते नजर आए। हुआ यूं कि सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा जिला अस्पताल विक्टोरिया के औचक निरीक्षण पर निकले तो ड्यूटी पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड ने कलई खोलते हुए साहब से कहा कि अस्पताल में सिर्फ दो ही सुरक्षा गार्ड ड्यूटी करते हैं। ये सुनकर साहब ने जब कागजों को चैक किया तो सामने आया कि ठेका कंपनी अस्पताल में 14 सुरक्षा कर्मियों का वेतन हर महीने लेकर सरकारी खजाने को खाली कर रही है जबकि हकीकत में दो गार्ड ही नौकरी कर रहे हैं।

आनन-फानन में सिविल सर्जन द्वारा बर्फानी सिक्योरिटी सर्विसेस को नोटिस जारी किया गया और जवाब तलब किया गया। इस खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग के सभी जिम्मेदारों के पैरों के नीचे की जमीन खिसका दी। ठेका कंपनी ऐसा भ्रष्टाचार कितने सालों से कर रही है ये कह पाना फिलहाल मुश्किल है क्योंकि मामला जांच की जद में है मगर यह देखना दिलचस्प होगा कि कार्रवाई कहां तक पहुंच पाती है। सूत्रों पर यकीन करें तो सीएमएचओ ने अस्पताल प्रबंधन प्रमुख को भी तलब किया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि कार्रवाई की आंच कई लोगों के गिरेबान तक जा सकती है। इस अस्पताल का एक अन्य मामला काबिलेगौर है जिसमें शौचालयों में लगी सफाई लिस्ट भी विगत अक्टूबर माह से नहीं बदली गई है, जाहिर है कि सफाई कर्मचारी सिर्फ हाजिरी लगाने ही अस्पताल आते हैं। विदित हो कि शहर के कई वार्डों में सफाई व्यवस्थाओं में लापरवाही बरतने पर बर्फानी सिक्योरिटी सर्विसेस का ठेका तक निगमायुक्त द्वारा निरस्त कर दिया गया है और ये ठेका कंपनी लापरवाही और भ्रष्टाचार के लिए शहर में मशहूर हो चुकी है।

प्रतिनियुक्ति पर आए और अंगद की तरह जमा लिए पैर….

नगर-निगम जबलपुर में पता नहीं ऐसा क्या है कि दूसरे जिलों से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारी-कर्मचारी अगर यहां आ गए तो वापस अपने मूल विभाग में कभी नहीं जाते। जबकि कुछ साल पूर्व प्रदेश सरकार ने अधिकारी-कर्मचारियों को दूसरे विभाग या दूसरे जिले में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के फैसले पर रोक लगा दी थी और निर्देश जारी किये थे कि प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कर्मचारी अधिकारी को उनके मूल विभाग में भेजा जाये लेकिन नगर निगम जबलपुर में ये देखा जा रहा है कि सालों से प्रतिनियुक्ति पर आए कई अधिकारी-कर्मचारी अंगद के पैर की तरह कुर्सी पर जमाए हुए हैं।

जानकारी के अनुसार नगर निगम में लगभग सौ से अधिक ऐसे अधिकारी- कर्मचारी है जो दूसरे विभागों और दूसरे जिलों से प्रतिनियुक्ति पर आए हैं लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी वह अपने मूल विभाग न तो जा रहे हैं और ना ही नगर निगम में बैठे जिम्मेदार अधिकारी ऐसे अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्यवाही कर रहे है। इतना ही नहीं नगर निगम जबलपुर में दूसरे जिलों से प्रतिनियुक्ति पर आए कई अधिकारी यहीं से रिटायर तक हो चुके हैं। जानकारों का कहना है कि जो दूसरे जिलों से प्रतिनियुक्ति पर जबलपुर नगर निगम में नौकरी करने आते हैं उनका वेतन नगर निगम जबलपुर से दिया जाता है ऐसे में नगर निगम के खजाने पर लगातार बोझ बढ़ता जा रहा है। खबर तो ये भी है कि नगर निगम जबलपुर व स्वास्थ्य विभाग में कई अधिकारी-कर्मचारी ऐसे हैं जिनके खिलाफ ईओडब्ल्यू सहित अन्य जांचें चल रहीं हैं बावजूद इसके उन्हें विभाग से नहीं हटाया गया है। जो कि स्पष्ट रूप से ये दर्शा रहा है कि अफसरों से इनकी सेटिंगबाजी कितनी तगड़ी है।

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