ग्वालियर: हर साल की तरह आज शुक्रवार को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर ग्वालियर में मंदिरों पर निर्जला एकादशी मनाई जा रही है। भक्त भगवान विष्णु की पूजा कर बिना जल ग्रहण किए उपवास रख रहे हैं, ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी में पानी पिए बिना रहना मुश्किल होता है इसीलिए इसे सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है और यह भी एक वजह है कि निर्जला एकादशी का व्रत अत्यधिक महत्व रखता है.
इस बार की निर्जला एकादशी बेहद खास है क्योंकि इस दिन तीन अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं, शुक्रवार का दिन, रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग. इन योगों के बनने से इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ गया है. ऐसा माना जा रहा है कि इस बार का व्रत कुछ राशियों के लिए विशेष शुभ फलदायक होगा. पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 6 जून की सुबह 2 बजकर 15 मिनट पर शुरू हुई और इस तिथि का समापन 7 जून सुबह 4 बजकर 47 मिनट पर हो जाएगा.
दोनों ही दिन उदयातिथि रहने से निर्जला एकादशी 24 घंटों तक रहने वाली है. लेकिन, व्रत पारण का समय दोपहर पड़ने के चलते एकादशी का व्रत 32 घंटे और 21 मिनट का होगा. एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 7 जून की दोपहर 1 बजकर 44 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 31 मिनट के बीच है. इस समयावधि में भक्त व्रत का पारण कर सकते हैं. वैष्णव संप्रदाय के लोग निर्जला एकादशी का व्रत 7 जून, शनिवार को रखेंगे. इस दिन व्रत रखने का अर्थ है कि अगले दिन व्रत पारण किया जाएगा. 7 जून को व्रत रखने वालों के लिए व्रत पारण का शुभ मुहूर्त 8 जून सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट पर होगा.
