इंदौर: शहर में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर भाजपा में सन्नाटा छा गया है। सारे सवाल और समस्या का दोषी सत्ताधारी दल को माना जा रहा है। जनता में चर्चा है कि अधिकारी नेताओं की नहीं सुन रहे हैं। इस बात की पुष्टि स्वयं महापौर ने कर दी है। आज एसीएस के सामने महापौर ने शहर में मौजूद अधिकारियों को लेकर काम नहीं करने का स्पष्ट मना कर दिया है।
भागीरथपुरा कांड की शिकायत पर सत्ता और अधिकारी के बीच समन्वय की कमी को लेकर कई संकेत नजर आए। भागीरथपुरा मामले को लेकर आज एसीएस संजय दुबे और स्थानीय नेताओं की बैठक पूरी तरह अधिकारियों की लचर कार्य शैली को लेकर शिकायत आधारित थी। बैठक में भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने एक बार फिर अधिकारियों को लेकर सवाल उठाए।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने एसीएस संजय दुबे को सीधे आयुक्त दिलीप यादव, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव के साथ काम नहीं कर सकने की बात कही। महापौर ने कल मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी अधिकारियों के रवैए को लेकर शिकायती लहजे में कहा था कि अधिकारी नहीं सुन रहे है। बैठक के दौरान महापौर ने असहज होकर हाथ खड़े करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में काम करना कठिन है, यह संदेश मुख्यमंत्री तक पहुंचाया दिया जाएं ।
आज की बैठक में भी उक्त बात कहने पर संजय दुबे ने जवाब दिया कि यदि सभी को हटा दिया जाएगा, तो आखिर काम किससे करवाएंगे ?बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जमीनी हकीकत बताते हुए कहा कि किसी के लिए भी भागीरथपुरा जाने की स्थिति नहीं है, लोगों में भारी आक्रोश है। वर्तमान हालात पर नियंत्रण नहीं पाया तो स्थिति बिगड़ सकती है।
कुल मिलाकर आज की एसीएस के साथ बैठक में अधिकारियों की मनमर्जी , अड़ियल रवैए और लापरवाही बरतने की शिकायत के सिवाय कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। चर्चा थी कि सरकार इतने बड़े हादसे के बाद कुछ अधिकारियों की रवानगी करेगी , लेकिन एसीएस दुबे के लहजे से नेताओं को निराश होना पड़ा।
