
इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले ने हाईकोर्ट का ध्यान खींचा है। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए सरकार से 2 जनवरी तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पीड़ितों के इलाज को लेकर भी अहम आदेश जारी किए हैं।
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई के चलते अब तक आठ लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने के मामले को लेकर हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं। एक याचिका एडवोकेट रितेश इनानी द्वारा और दूसरी पूर्व पार्षद महेश गर्ग एवं प्रमोद द्विवेदी की ओर से एडवोकेट मनीष यादव के माध्यम से लगाई गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से चीफ जस्टिस से मामले में अर्जेंट सुनवाई की मांग की गई थी। याचिकाओं में कहा गया कि यह घटना आम नागरिकों की जान के साथ घोर लापरवाही का मामला है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना जरूरी है।
शीतकालीन डिविजन बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से कहा कि वह पूरे मामले में अब तक की कार्रवाई, जिम्मेदारी तय करने की स्थिति और आगे की योजना को लेकर 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। इसके साथ ही कोर्ट ने दूषित पानी से बीमार हुए सभी पीड़ितों का निशुल्क इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी विभिन्न अस्पतालों में इलाजरत हैं। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
