इंदौर, 31 दिसंबर, 2025: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है, जिसमें अब तक 8 लोगों की जान जाने की खबर है। हालांकि प्रशासन आधिकारिक तौर पर केवल 3 मौतों की पुष्टि दूषित पानी से कर रहा है, जबकि अन्य को अन्य बीमारियों का कारण बता रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र के लगभग 2000 लोग प्रभावित हैं और 66 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में जीवन और मौत की जंग लड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा लंबे समय से गंदे पानी की सप्लाई की जा रही थी, जिस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया।
इस मानवीय त्रासदी पर सियासत भी गरमा गई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि इंदौर की जनता ने भाजपा को भारी बहुमत दिया, लेकिन बदले में उन्हें “पानी में जहर” मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को विफल बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही निर्दोष लोगों की जान ले रही है। पटवारी ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री स्वयं इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं, इसके बावजूद इतनी बड़ी लापरवाही होना सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। लापरवाही बरतने के आरोप में जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले और असिस्टेंट इंजीनियर योगेश जोशी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही, तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है जो पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी विधिक कार्रवाई की जा सके।

