
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध *बैढन* की अदालत में चल रहे दहेज प्रकरण पर रोक लगा दी है और अनावेदकों से जवाब तलब किया है।
मऊगंज के निवासी सुधीर कुशवाहा एवं दिनेश कुशवाहा की ओर से अधिवक्ता मनोज कुशवाहा एवं कौशलेंद्र सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सुधीर का विवाह नवंबर 2024 में हिंदू रीति-रिवाज से तहसील बैढऩ जिला सिंगरौली में संपन्न हुआ था। जनवरी 2025 में पत्नी स्वयं घर छोडक़र चली गई। याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों से यह प्रतीत हुआ कि पत्नी विवाह से प्रसन्न नहीं थी और किसी अन्य व्यक्ति से विवाह करना चाहती थी। इसी कारण वह वापस नहीं आई। इसके पश्चात जून 2025 में उसने महिला थाना, सिंगरौली में याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध दहेज अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी द्वारा पति एवं उसके चाचा दिनेश के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया असत्य प्रतीत होते हैं। जिस चाचा को अभियुक्त बनाया गया है, वह घटनास्थल पर निवासरत ही नहीं था। वह सतना का निवासी है और उसके द्वारा कभी भी दहेज संबंधी कोई मांग नहीं की गई है। हाईकोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता द्वारा दुर्भावनापूर्ण मंशा से कार्यवाही की गई है तथा यह दहेज अधिनियम के दुरुपयोग का मामला प्रतीत होता है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने निचली अदालत पर चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी।
