नई दिल्ली। 23 दिसंबर, 2025। अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी खबर है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ‘ऑनलाइन प्रेजेंस रिव्यू’ (Online Presence Review) का विस्तार करते हुए अब H-1B और H-4 वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया गतिविधियों की गहन जांच शुरू कर दी है। 15 दिसंबर से प्रभावी हुए इस नए नियम के तहत, आवेदकों के फेसबुक, X (ट्विटर) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। सुरक्षा मानकों को और अधिक कठोर बनाने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम का सीधा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ रहा है, क्योंकि अब वीजा स्क्रीनिंग की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक जटिल और विस्तृत हो गई है।
इस नई जांच प्रक्रिया की वजह से वीजा प्रोसेसिंग में भारी देरी हो रही है, जिससे सैकड़ों भारतीय पेशेवर मुश्किल में फंस गए हैं। वर्तमान में अपने वर्क परमिट के रिन्यूअल के लिए भारत आए कई पेशेवरों के इंटरव्यू अचानक रद्द कर दिए गए हैं और उन्हें अगले साल मार्च से मई तक की लंबी तारीखें दी जा रही हैं। वैध वीजा के अभाव में वे समय पर अमेरिका वापस नहीं लौट पा रहे हैं, जिससे उनकी नौकरियों और वहां चल रही घर की ईएमआई (EMI) जैसे वित्तीय दायित्वों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा कारणों से अब अतिरिक्त ‘प्रसंस्करण समय’ (Processing Time) लगना अनिवार्य है।
अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि इस सख्त स्क्रीनिंग का मुख्य उद्देश्य H-1B कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा को अभेद्य बनाना है। दूतावास की ओर से जारी बयान में कड़े शब्दों में कहा गया है कि अमेरिकी वीजा प्राप्त करना एक विशेषाधिकार है, कोई अधिकार नहीं। ट्रंप प्रशासन के तहत सुरक्षा जांच को और अधिक कठोर बनाने की इस मुहिम के बीच आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे अपने सोशल मीडिया हैंडल्स की सटीक जानकारी दें। विशेषज्ञों का कहना है कि जो भारतीय पेशेवर टेक कंपनियों की रीढ़ हैं, उन्हें अब अपनी यात्रा और रिन्यूअल की योजना कई महीने पहले से बनानी होगी ताकि किसी भी अप्रत्याशित देरी से बचा जा सके।

