मुख्यमंत्री से एक गरीब पिता की गुहार

मध्य क्षेत्र की डायरी
दिलीप झा
सीहोर
:पुलिस कानून के अनुसार काम नहीं कर रही है। अगर कानून के रक्षक ही भक्षक बन जाए तो फिर शासन व्यवस्था कैसे चलेगी,यह गंभीर सवाल है। इसलिए वर्तमान डीजीपी अशोक मकवाना को इस मामले को गंभीरता से देखना चाहिए ताकि पिछले चार वर्षों से न्याय के लिए दर दर भटक रहे एक गरीब वृद्ध पिता को न्याय मिल सके। कल्पना कीजिए कि राजधानी भोपाल के नजदीक सीहोर में पुलिस की कार्यशैली का यह हाल है तो बाकि दूरदराज जिलों में क्या चल रहा है,यह बताने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इसकी बानगी अक्सर देखने को मिलती रहती है।

सीहोर पुलिस इतनी बेलगाम हो गई कि एक गरीब के साथ इतनी क्रूरता से पेश आती है तो जाहिर है अपराधियों के साथ इनके याराना संबंध बन गए हैं। आइए पूरी कहानी वृतांत से बताते हैं कि आखिर एक टेलर मास्टर के साथ सीहोर पुलिस ने आखिर क्या व्यवहार किया कि वह सदमे में आ गया है। वर्ष 2021 अर्थात कोरोना काल के दौरान 5 जून की वह काली रात को वह जीवन भर कैसे भूल सकता है जिसने उसकी औलाद छीन ली है‌।

अब वह बेसहारा हो गया है। टेलर मास्टर विजय कुमार बाघेला निवासी झागरिया कालोनी सीहोर ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव से गुहार लगाई है कि उनके बेटे की हत्या मामले की सीबीआई जांच कराई जाए ताकि सीहोर पुलिस का घिनौना कारनामा लोगों के सामने आए कि किस तरह हत्या को दुर्घटना करार दिया। विजय बाघेला ने पुलिस को दिए कथन में यह स्पष्ट कहा है कि उनके बेटे को एक महिला के साथ नाजायज रिश्ते में फंसाया गया और बाद में उसकी पीट पीटकर हत्या कर दी गई लेकिन पुलिस इसके तह तक जाने के बजाय उन्हें ही प्रताड़ित कर रही है। टेलर मास्टर विजय का दर्द यह है आज तक उनके बेटे की हत्या की जांच आगे नहीं है।

विजय ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है और उन्हें भद्दी भद्दी गालियां दे रही है। ऐसे में उनका जीवन नर्क हो गया है। सीहोर पुलिस के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और उसके अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यशैली पर यह बड़ा आरोप है कि उसने एक गरीब टेलर मास्टर के बेटे की हत्या को दुर्घटना बता दिया और हत्यारे के साथ मिलकर एक अलग कहानी बना दी। पुलिस प्रशासन को ऐसे मामले की जांच गंभीरता से करनी चाहिए ताकि जघन्य अपराध करने वालों पर शिकंजा कसा जा सके।

एमपी के प्राइवेट विश्वविद्यालय में धांधली

मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री रहे डॉक्टर मोहन यादव अब प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। जाहिर है उच्च शिक्षा विभाग में क्या चल रहा है, इससे वह पूरी तरह वाकिफ हैं। बावजूद इसके उच्च शिक्षा विभाग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसमें सबसे खराब स्थिति प्राइवेट विश्वविद्यालय का है। नाम के लिए निजी विश्वविद्यालय आयोग बना है। सूत्रों का कहना है कि निजी विश्वविद्यालय आयोग अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर सकता है क्योंकि उन्हें भी अपना काम नहीं करने दिया जा रहा है। पूरे प्रदेश में निजी विश्वविद्यालय के नाम पर बहुत बड़ा गोरखधंधा चल रहा है। यूजीसी के नियम कानून तो यहां ताक पर रख दिया गया है। हर साल लाखों छात्र इन प्राइवेट विश्वविद्यालय में दाखिला लेते हैं लेकिन वे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा हासिल करने में असफल हो जाते हैं। क्योंकि प्राइवेट विश्वविद्यालय में फैकल्टी की व्यवस्था चरमरा गई है। आलम यह है कि यूजीसी के मानक पर यहां के विश्वविद्यालय फिट नहीं बैठ रहे हैं लेकिन विडंबना है कि फिर भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।
प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों में गोरखधंधा जोरों पर है। लाखों छात्र हर साल बाहर के राज्यो से भी यहां आते हैं लेकिन उन्हें गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा नसीब नहीं होती है। निजी विश्वविद्यालय वाले एक एक स्टुडेंट से 5 से 10 लाख की फीस लेते हैं इंजीनियर और डाक्टर बनाने के लिए लेकिन लास्ट सेमेस्टर तक देश की प्रमुख कंपनियों में प्लेसमेंट नहीं करवा पाते हैं। सूत्र बताते है कि इसके पीछे भी भ्रष्टाचार का हाथ है। सभी विश्वविद्यालय में बने प्लेसमेंट सेल में कार्यरत लोग निर्थक और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि प्लेसमेंट कराने वाले विश्वविद्यालय के कर्मी एक लाख से दो लाख रुपये स्टूडेंट्स से प्लेसमेंट के नाम पर लूट लेते हैं। प्लेसमेंट के नाम पर धोखाधड़ी कर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर सरकार का सिस्टम शिकंजा कसने में कारगर नहीं है। जिस युवा के हाथों में देश का बागडोर होगा उसे अगर भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण नहीं मिलेगा तो उनसे बेहतर नेतृत्व की उम्मीद बेईमानी होगी।

Next Post

62 वर्ष के हुये गोविंदा

Sun Dec 21 , 2025
मुंबई, 21 दिसंबर (वार्ता) बॉलीवुड में अपनी डांसिग स्टाइल और कॉमेडी अभिनय से दर्शको के दिलों मे खास पहचान बनाने वाले गोविंदा आज 62 वर्ष के हो गये। 21 दिसंबर 1963 में जन्में गोविन्दा फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता अरूण आहूजा अभिनेता जबकि मां निर्मला देवी चालीस […]

You May Like