तेहरान, 15 अप्रैल (वार्ता) ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने घोषणा की है कि ईरान को ‘आत्मसमर्पण’ के लिए मजबूर करने की अमेरिका या इजरायल की किसी भी कोशिश का ‘विफल होना तय’ है। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग किसी हाल में इसे स्वीकार नहीं करेंगे।
श्री पेजेशकियान ने बुधवार को तेहरान के आपातकालीन सेवा अधिकारियों के साथ बैठक में इस बात पर जोर दिया कि ईरान ने कभी युद्ध या अस्थिरता नहीं चाही है। वह अन्य देशों के साथ निरंतर संवाद और रचनात्मक जुड़ाव का पक्षधर रहा है।
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का नाम लिये बिना राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यवहार में ‘दोहरे मानदंडों’ की आलोचना की और संप्रभु राष्ट्रों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की निंदा की। अमेरिकी-इजरायली आक्रामकता के बावजूद ईरान के सैद्धांतिक रुख का जिक्र करते हुए श्री पेजेशकियान ने कहा, “ईरान युद्ध या अस्थिरता नहीं चाहता है।”
श्री पेजेशकियान ने सेवा वितरण और परिचालन तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा, “हालांकि, अपनी इच्छा थोपने या देश को अधीनता के लिए मजबूर करने का कोई भी प्रयास विफल होना तय है और ईरान इस तरह के दृष्टिकोण को कभी स्वीकार नहीं करेगा।”
उन्होंने सवाल किया, “अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के भीतर नागरिकों, विशिष्ट हस्तियों, बच्चों को निशाना बनाने और स्कूलों तथा अस्पतालों जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों को नष्ट करने का क्या औचित्य है?” राष्ट्रपति ने अमेरिकी और इजरायली सेनाओं के साथ 40 दिनों के संघर्ष के दौरान ईरानी लोगों की ‘अद्वितीय और अनुकरणीय एकता’ की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसी एकता ने दुश्मनों के उद्देश्यों को विफल कर दिया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता, प्रबंधकों और सेवा प्रदाताओं के बीच इसी भावना को बनाये रखने से राष्ट्रीय शक्ति मजबूत होगी। उन्होंने आगे कहा, “ऐसी परिस्थितियों में, कोई भी शक्ति इस राष्ट्र को घुटनों पर नहीं ला पायेगी।”
गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर अकारण युद्ध शुरू कर दिया था, जिसमें तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई और शीर्ष सैन्य कमांडरों की हत्या कर दी गयी थी। ईरान ने अपनी दृढ़ सैन्य प्रतिक्रिया के साथ उन्हें 40 दिनों के बाद युद्धविराम स्वीकार करने के लिए मजबूर कर दिया।
