नई दिल्ली। पड़ोसी देश चीन ने एक बार फिर भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) का दरवाजा खटखटाया है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों पर भारत द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ और घरेलू उद्योगों को दी जाने वाली सब्सिडी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। चीन का आरोप है कि भारत की ये नीतियां विश्व व्यापार संगठन के वैश्विक नियमों का उल्लंघन करती हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने के लिए अपनाई गई सख्त व्यापारिक नीतियों से चीन को अपने हितों पर चोट पहुंचती नजर आ रही है।
चीनी मंत्रालय ने दावा किया है कि भारत सरकार की सब्सिडी और टैरिफ नीतियों के कारण भारतीय घरेलू उद्योगों को गलत तरीके से ‘कॉम्पिटिटिव एडवांटेज’ मिल रहा है, जिससे चीनी उत्पादों को भारतीय बाजार में समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। चीन चाहता है कि भारत अपने घरेलू बाजार में उसे खुली छूट दे, जबकि भारत सरकार स्थानीय विनिर्माण को सशक्त बनाने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत ने चीन से लगभग 126.96 बिलियन डॉलर का आयात किया था, लेकिन भारत की नई नीतियों के बाद चीन को अपना यह विशाल बाजार हाथ से खिसकता महसूस हो रहा है।
भारत वर्तमान में चीन से सबसे अधिक इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, मोबाइल कंपोनेंट और मशीनरी का आयात करता है। चीन अपनी विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के दम पर भारतीय बाजार पर एकाधिकार चाहता है, जिसे भारत के ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ (PLI) जैसी योजनाओं ने कड़ी टक्कर दी है। इससे पहले भी चीन ने अक्टूबर में भारत के खिलाफ ऐसी ही शिकायत दर्ज कराई थी। जानकारों का मानना है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की जो उम्मीद जगी थी, चीन के इस कदम से उन द्विपक्षीय वार्ताओं और व्यापारिक रिश्तों में फिर से तल्खी आ सकती है।

