
भोपाल: आयुष्मान कार्डधारक को इलाज देने से कोई भी संबद्ध अस्पताल मना नहीं कर सकता और न ही इलाज के नाम पर कोई अस्पताल उनसे रुपये ले सकता है. लेकिन राजधानी समेत प्रदेश की अस्पतालों में इससे उल्टा हो रहा है. पहले प्राइवेट अस्पताल मरीज को आयुष्मान कार्ड के जरिये इलाज करने का कहकर भर्ती कर लेते है. फिर आयुष्मान कार्ड से आपका बिल नहीं हो रहा है. ऐसा कहकर मरीज और उसके परिजनों पर बिल जमा करने का दबाव बनाते है। इतना ही नहीं बिल नहीं देने पर मरीज की छुट्टी में भी आनाकानी करते है।
यदि किसी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज करने से मना किया जाता है या इलाज के बाद डिस्चार्ज के समय आपसे किसी बहाने से बिल मांगा जाता है तो सबसे पहले वहां मौजूद आयुष्मान मित्र से लिखित में कारण पूछना चाहिए। अगर समाधान न मिले तो टोल फ्री नंबर 14555 या 104 पर शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा राज्य हेल्पलाइन नंबर 0755-2762582 और 18002332085 सहित जिला कलेक्टर कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। सीएम हेल्पलाइन पर भी अस्पताल की शिकायत का विकल्प है।
अस्पतालों के बहाने
अस्पताल अक्सर बेड नहीं होने, सर्वर खराब होने या कैश मांगने जैसे बहाने बनाते हैं। जबकि नियम के अनुसार पात्र मरीज को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलना चाहिए। इसमें जांच, इलाज के दौरान खाना और डिस्चार्ज के बाद की दवाएं भी शामिल हैं। प्रदेश में चार करोड़ से अधिक लोग आयुष्मान योजना में पंजीकृत हैं. जिसके लिये 588 निजी और 498 सरकारी अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं।
– यदि अस्पताल छुट्टी नहीं करते है तो क्या कार्रवाई होती है
किसी भी अस्पताल में मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है या उनसे पैसे भरने को कहा जा रहा है. तो हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत के बाद इस पर त्वरित कार्यवाही की जाती है. किसी स्थिति में अगर परिवारजन मरीज को डिस्चार्ज करवाकर बिल भर भी देते हैं, उसके बाद भी वह शिकायत कर सकते हैं. जांच के बाद उन्हें पूरे पैसे वापस कर दिए जायेंगे और संबंधित अस्पताल पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
डॉ. योगेश तुकाराम भरसट, आई.ए.एस.,मुख्य कार्यपालन अधिकारी
