संजय गुप्ता
शाहपुर:राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 में प्रत्येक स्कूल में बच्चों की पहुँच में पुस्तकालय की किताबें उपलब्ध कराने और उनके नियमित उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। नीति के तहत फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) के आठ आयामों में ‘पढ़ने की संस्कृति’ को एक महत्वपूर्ण आयाम माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्कूल का वातावरण और शिक्षक इस दिशा में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते, तब तक बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना संभव नहीं है।इसी सोच के साथ ऑरेकल के वित्तीय सहयोग से एकलव्य संस्था शाहपुर ब्लॉक के 20 प्राथमिक स्कूलों में ‘पुस्तकालय संवर्धन कार्यक्रम’ संचालित कर रही है। इस कार्यक्रम से 20 स्कूलों के कुल 1020 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूल पुस्तकालयों को केवल किताबों का कमरा न बनाकर, बच्चों के लिए सीखने और आनंद का जीवंत केंद्र बनाना है।
पुस्तकालय को चलाने में बच्चे भी बने भागीदार
कार्यक्रम के तहत सभी 20 स्कूलों में पाँच–पाँच बच्चों को ‘रिसोर्स बच्चे’ के रूप में चुना गया है। इन बच्चों को पुस्तकालय संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। एकलव्य टीम और स्कूल शिक्षकों के मार्गदर्शन में ये बच्चे पुस्तकालय की व्यवस्था, किताबों के उपयोग और गतिविधियों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षण और स्कूल स्तर पर होने वाली बैठकों के माध्यम से रिसोर्स बच्चों को पुस्तकालय संचालन की बुनियादी समझ मिलती है। इससे वे किताबों से जुड़ते हैं और अन्य बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इन बच्चों की पहल से स्कूलों में पुस्तकालय की किताबों के प्रति बच्चों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
साल में दो बार होती है विशेष कार्यशाला
पुस्तकालय संवर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत एकलव्य टीम रिसोर्स बच्चों के लिए साल में दो बार एक दिवसीय पुस्तकालय आधारित कार्यशाला का आयोजन करती है। इन कार्यशालाओं में प्रत्येक स्कूल से चयनित पाँच–पाँच बच्चे शामिल होते हैं। यहां बच्चों को पुस्तकालय संचालन की जरूरी बातें सिखाई जाती हैं और किताबों से जुड़ी रचनात्मक गतिविधियाँ कराई जाती हैं, ताकि वे पढ़ने को बोझ नहीं बल्कि आनंद के रूप में देखें।
100 बच्चों के लिए ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला आयोजित
इसी क्रम में शाहपुर ब्लॉक के 20 स्कूलों के 100 रिसोर्स बच्चों के लिए 16 और 17 दिसंबर 2025 को दो चरणों में ब्लॉक स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दौरान बच्चों के साथ पुस्तकालय की किताबों पर आधारित कई रोचक गतिविधियाँ कराई गईं। इनमें किताबों के किरदारों को पत्र लिखना, किताबों पर चर्चा, किताब समीक्षा और अनुभव लेखन, कविताओं का गायन तथा किताबों का बाज़ार लगाना और खरीदना (ड्रामा गतिविधि) शामिल रही।
बच्चों ने इन पठन–लेखन गतिविधियों में उत्साह के साथ भाग लिया और पढ़ने के आनंद को महसूस किया। कार्यशाला के दौरान बच्चों को दूसरे स्कूलों से आए बच्चों से मिलने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी मिला, जिससे आपसी सीख और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई।
चार स्थानों पर हुआ आयोजन, 20 स्कूलों के बच्चे हुए शामिल
16 दिसंबर को डेन्डुपुरा और पावरझंडा तथा 17 दिसंबर को सालीमेट और झापड़ी में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में शाहपुर ब्लॉक के 20 प्राथमिक स्कूल—पावरझंडा, रायपुर, पहावाड़ी, जामुनढाना, भौराढाना, मगरडोह, नौरंगढाना, गुरगुन्दा, हांडीपानी, बानाबेहड़ा, सालीमेट, चिरमाटेकरी, बोड़ीपानी, धपाड़ामाल, धपाड़ारैयत, डेन्डुपुरा, भातना, रानापुरा, झापड़ी और जोड़ियामहू—से कुल 100 बच्चों ने सहभागिता की।कार्यक्रम के माध्यम से स्कूलों में पढ़ने का माहौल मजबूत हो रहा है और बच्चे किताबों से जुड़कर अपनी भाषा, सोच और नेतृत्व क्षमता को विकसित कर रहे हैं।
