
सीधी। जिले में मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। आज से कोहरे का प्रकोप शुरू हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कोहरे की धुंध सुबह करीब 10 बजे तक बनी रही। शहरी क्षेत्र में भी आज सुबह घना कोहरा छाए रहने से जन जीवन अस्त व्यस्त रहा। थर्मामीटर का पारा लुढक रहा है। आकाश में बादलों के छाने के कारण सूर्यदेव का ताप भी दिन में कमजोर रहा। आज न्यूनतम तापमान 9 डिग्री एवं अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आस पास बना रहा।
सुबह कोहरे के कारण वाहन चालकों को आवागवन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है। दिन का तापमान गिरने से दिन में भी लोगों को ठिठुरन भरी गलन का एहसास हो रहा है। घने कोहरे के साथ कड़ाके की सर्दी का दौर शुरू हो चुका है। ठंड बढ़ जाने से जिले का सामान्य जन जीवन अस्त व्यस्त हो चुका है। सुबह घने कोहरे के कारण सडकों पर पास खड़े लोग भी दिखाई देने में काफी समस्या बनी रही। सुबह टहलने के लिए निकले लोगों को कोहरे के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों को भी सुबह 8 बजे तक लाइट जलाकर वाहन चलाने की मजबूरी बनी हैं। कोहरे के अलावा ठिठुरन भरी गलन ने लोगों को कड़ाके की ठंड का एहसास करा दिया है। रविवार को दिन का न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
गलन भरी ठंड से बचने के लिए लोग गरम कपड़ों से दिन को भी लिपटे नजर आ रहे हैं। विद्यार्थियों के साथ ही अपने रोजमर्रा के कार्यों में निकले लोग कड़ाके की ठंड के बीच मजबूरी में निपटाते नजर आए। जिस रफ्तार से गलन भरी ठंड का असर बढ़ रहा है उससे यह माना जा रहा है कि एक सप्ताह में ठंड सबाब पर पहुंच जाएगी। कड़ाके की सर्दी के साथ घने कोहरे का नजारा देखने शहरी क्षेत्रों में सुबह से बड़ी संख्या में लोग पार्क और खेल मैदान में पहुंच जाते हैं। सुबह 8 बजे के बाद धीरे-धीरे कोहरा हल्का हुआ। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आधे दिन तक धुंध छाई रही। कोहरे के कारण रविवार को सुबह 10 बजे तक सडकों में तेज आवागमन शुरू नहीं हो पाया। सर्दी से बचने के लिए लोग घरों में आग जलाकर हाथ सेंकते रहे। दोपहर बाद लोग खरीददारी करने घरों से बाहर निकले।
पाला लगने का फसलों में बढ़ा खतरा
ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों पर पाले की संभावना निर्मित हो रही है। पिछले वर्ष भी जिले में पाले के कारण फसलों को आगे खतरा की संभावना निर्मित होने लगी है। पाले के लिए आलू, मटर, धनिया, सरसों, अरहर सेंसेटिव फसलें हैं। नीचे तापमान जाने पर पाला पडने की संभावना बढ़ जाता है। चर्चा के दौरान कुछ किसानों का कहना था कि ऐसा आभाष हो रहा है कि इस वर्ष शीतलहर का प्रकोप जनवरी के पहले ही निर्मित हो जाएगा। अभी तक जनवरी महीने में ही घने कोहरे के साथ ही शीतलहर का प्रकोप शुरू हो जाने पर फसलों को पाला लगने का खतरा गंभीर रूप से बढ़ जाता है। ऐसा आभाष हो रहा है कि ठंड के दिनों में जिस तरह से मौसम लगातार करवटें ले रहा है उसके कारण शीतलहर की दस्तक भी जल्द ही शुरू होने वाली है। इसी वजह से किसानों की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। कोहरा एवं शीतलहर से सबसे ज्यादा क्षति आलू, मटर, धनिया, सरसो, अरहर की फसलों को उठाना पड़ता है। वर्तमान में सभी फसलों की पैदावार काफी अच्छी है। यदि कोहरा एवं पाला का दौर शुरू हुआ तो निश्चित ही फसलें भी इसके प्रभाव में आएंगी।
