चलित चक्की के माध्यम से सडक़ों पर हो रही धान दराई

सीधी। चलित धान चक्की का प्रचलन ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी के साथ बढऩे के कारण यह मुख्य सडक़ोंं के लिए बड़ा जोखिम भी बन चुका है। ट्रैक्टर चालक मुख्य सडक़ों पर ही धान की चक्की को चालू करके घंटों दराई का कार्य शुरू रखतेे हैं। धान की चक्की जब तक सडक़ में शुरू रहती है वहां से निकलने वाले लोगों को उडऩे वाली भूसी के चलते भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वहां से गुजरने वाले अन्य वाहनों मेंं सवार लोगों की आंंख के अंदर भी उडऩे वाली भूसी जाकर बड़ी समस्या खड़ा कर देती है। कई बार तो वाहन चालक के आंख में भूसी चली जाने से उसको सुरक्षित अपना वाहन चलाने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही मुख्य सडक़ से गुजरने वाले राहगीरों को भी उड़ती भूसी के चलते धूल से सराबोर होना पड़ता है। स्थिति यह है कि सभी मार्गो में टै्रक्टर सेे जुड़ी धान चक्की को सडक़ पर चालू कर धान की धराई करते हुए अक्सर देखा जाता है। जिसके चलते यहां से गुजरने वाले अन्य वाहनों को काफी समस्याएं उठानी पड़ती है। चर्चा के दौरान कुछ ग्रामीणों ने बताया कि चलित चक्की जिनके द्वारा मुख्य सडक़ों में खड़ी करके धान की दराई की जाती है वह सभी स्थानीय ही होते हैं। इस वजह से विरोध करने पर विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि आज गांव में कई ट्रैक्टर मालिक अतिरिक्त कमाई के लिए चलित धान चक्की रखेे हुए हैं। जिस स्थान में धान दराई की सूचना मिलती है वह कुुछ समय के अंदर ही वहां चलित चक्की को टै्रक्टर मेें लगाकर पहुंचा देते हैं। ग्रामीण भी चलित चक्की के माध्यम से घर के सामने धान की दराई हो जाने से काफी राहत पाते हैं। इसी वजह से धान के सीजन के दौरान चलित चक्की की मांग काफी बढ़ जाती है। रोजाना ग्रामीण क्षेत्रों के मुख्य मार्गों एवं अंदर के मार्गों में चलित चक्की को देखा जा सकता है। जिस स्थान पर चलित चक्की शुरू होती है वहां कम से कम दो-तीन घंटे वह जमी रहती है। यदि व्यस्त मार्ग हुआ तो उस दौरान वहांं से गुजरने वाले वाहन चालकों एवं सवारों को काफी परेशानियां उठानी पड़ती है। इस मामलेे में जिम्मेदार भी पूरी तरह से निष्क्रिय बने हुए हैं। जिससे यह समस्या दिनोंदिन बढ़ रही है।

बिना लायसेंस के संचालित हो रही चलित धान चक्की

ग्रामीण क्षेत्रों में टै्रक्टरों के माध्यम से ही धान चक्की का संचालन किया जा रहा है। जानकारों के अनुसार चलित धान चक्की संचालित करने के लिए संबंधित के पास लायसेंस होना आवश्यक है। फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में जो भी चलित धान चक्की संचालित हो रही है उनके पास किसी भी विभाग के माध्यम सेे अनुमति प्राप्त नहीं है। घर-घर पहुंचकर धान दराई की सुविधा देेने के नाम पर लोगों से मनमानी राशि भी ऐंठी जा रही है। हैरत की बात तो यह है कि ग्रामीण क्षेत्रोंं में आवागमन को बाधित कर रही चलित धान चक्कियों के पास लायसेंस है या नहीं यह जानने की जरूरत स्थानीय पुलिस भी नहीं समझती। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में जिनके पास टै्रक्टर है वह अतिरिक्त कमाई करने के लिए चलित धान चक्की की व्यवस्था भी प्राथमिकता के साथ बनाए हुए हैंं। जिससे अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर धान की दराई करें। अब तो स्थिति यह है कि नगरीय क्षेत्रों में भी आसपास के ग्रामीण इलाकों से चलित धान चक्की पहुंच रही है। जिसके चलते जिन स्थानों में यह धान चक्की शुरू होती है वहां के लोगोंं को घंटों उड़ती भूसी के चलते भारी प्रदूषण में समय गुजारने की मजबूरी निर्मित हो जाती है।

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