
जबलपुर। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस राम कुमार चौबे की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि मृत्यु पूर्व बयान बिना किसी पुष्टि के भी दोषसिद्धि का आधार है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ पत्नी के हत्या के आरोप में सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया।
नरसिंहपुर जिले के सिंहपुर बडा निवासी अमित चौकसे की तरफ से दायर अपील पत्नी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने को चुनौती दी गयी थी। अपीलकर्ता की तरफ तर्क दिया गया कि सभी अभियोजन गवाह को सुनवाई के दौरान पक्ष विरोधी घोषित कर दिया गया था। अचानक विवाद होने के कारण घटना घटित हुई थी तो प्रकरण गैर इरादतन हत्या का मामला बनता है। पत्नी ने स्वयं आग लगाई थी।
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान मृतक के पिता ने पुलिस को सूचित किया था कि उसके बेटे ने अपनी पत्नी पर केरोसिन तेल डालकर जला दिया है। पत्नी ज्योति ने भी मृत्यु पूर्व बयान में कहा था कि उसके पति ने केरोसिन तेल डालकर उसे जलाया है। सुनवाई के दौरान आरोपी की बात-पिता व रिष्तेदार अपने बयान से मुकर गये। इसके अलावा आरोपी की सास तथा साला ने भी अपने बयान में कहा है कि उन्होंने घटना होते हुए नहीं देखी। उसका आरोपी से समझौता हो गया है और वह दोनों बच्चो की अच्छे से देखभाल करते हुए पढाई करवायेगा। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि न्यायालय को मृत्युपूर्व बयान किसी दबाव में दर्ज नहीं करवाया गया है और न्यायालय को उस पर भरोसा है कि बिना साक्ष्य के भी दोषसिद्धि का आधार है। आरोपी के पिता ने घटना के संबंध में पुलिस को सूचित किया था। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ अपील को खारिज कर दिया।
