
इंदौर. राष्ट्रीय टाइगर गिनती की तैयारी को पक्का करने के लिए इंदौर वन मंडल की टीमों ने जंगलों में दो दिन तक शाकाहारी और मांसाहारी के वन्यजीवों के निशान लिए वहीं उनके रहने वाले इलाके का ज़मीनी सर्वे पूरा कर लिया है.
मंडलाधिकारी प्रदीप मिश्रा ने बताया कि ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन 2026 से पहले इंदौर वन मंडल ने दो दिवसीय अभ्यास के दौरान बड़े पैमाने पर फील्ड सर्वे पूरा कर लिया है. पहले दिन मांसाहारी जानवरों के निशान जुटाए गए थे, जबकि दूसरे दिन इंदौर, चोरल, महू और मानपुर परिक्षेत्रों के 102 बीट तथा रालामंडल अभयारण्य में शाकाहारी प्रजातियों की मौजूदगी और उनके आवास की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया. इस दौरान टीमों ने चीतल, नीलगाय, सांभर, ब्लैकबक, खरहा, लंगूर और मोर जैसी प्रजातियों के कई संकेत तलाशे जैसे चराई के निशान, ताज़े खुरों के प्रिंट, विभिन्न प्रजातियों के मल-पेलिट्स और झाड़ियों पर चराई के दबाव के संकेत. सुबह तय मार्गों पर चलते हुए इन सभी चिन्हों को दर्ज किया गया, ताकि इलाके में शाकाहारी जानवरों की संख्या और उनकी गतिविधि का अंदाजा लगाया जा सके. सर्वे के दौरान यह भी देखा गया कि जंगल की वनस्पति कैसी है, किन जगहों पर ज्यादा चराई का दबाव है, कहां लकड़ी कटाई के संकेत मिलते हैं और किन हिस्सों में मवेशियों की आवाजाही ज्यादा रहती है. अधिकारियों का कहना है कि ये सभी बातें जंगल के स्वास्थ्य और जानवरों की मौजूदगी को सीधा प्रभावित करती हैं. वन मंडलाधिकारी ने बताया कि इस तरह का अभ्यास जरूरी है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली असली गिनती के दौरान फील्ड स्टाफ कोई गलती न करे. इससे डेटा इकट्ठा करने की सटीकता बढ़ती है और टाइगर सर्वे के लिए भरोसेमंद जानकारी मिलती है.
