ईरान के बाद ट्रंप किसी और देश को टारगेट कर सकते हैं

नई दिल्ली, 07 मार्च (वार्ता) विश्व शांति मोर्चा (डब्ल्यूपीएफ) की पूर्व महासचिव यान जुएतोंग ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते दूसरे देशों के बीच और भी टकराव उभरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

श्री जुएतोंग ने यूनीवार्ता को दिए एक खास साक्षात्कार में कहा कि हाल की वैश्विक राजनीति एक चिंताजनक पैटर्न की ओर इशारा करती है।

उन्होंने कहा, “ईरान किसी भी संभावित अमेरिकी हमले से खुद को बचाने के लिए किसी बाहरी ताकत पर भरोसा नहीं कर सकता। यह कड़वी सच्चाई है। ट्रंप प्रशासन ने बारह महीनों में सात देशों पर हमला किया। अब यह ईरान है। ईरान के बाद कोई और देश हो सकता है। अमेरिकी रवैये को समझना मुश्किल नहीं है।”

श्री ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि क्यूबा अगला टारगेट हो सकता है, जबकि अमेरिका ईरान के साथ तनाव में फंसा हुआ है। इस बात के संकेत हैं कि अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो को इस मुद्दे के निपटारे का काम सौंपा जा सकता है। श्री जुएतोंग के मुताबिक यह स्थिति देश की संप्रभुता की रक्षा करने की अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की काबिलियत पर और गहरे सवाल खड़े करती है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का जिक्र करते हुए कहा कि जब ताकतवर देश शामिल होते हैं तो नियम अनुपालन प्रणाली कमजोर हो जाती है।

श्री जुएतोंग ने कहा, “तो असली सवाल सिर्फ ईरान के बारे में नहीं है। इस बारे में है कि क्या किसी भी देश की संप्रभुता की रक्षा की जा सकती है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर कहता है कि सदस्य देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए लेकिन यह हमें यह नहीं बताता कि जब उल्लंघन करने वाला दुनिया का सबसे ताकतवर देश हो तो इसे कैसे लागू किया जाए।”

 

 

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