इसरो ने इजेक्शन पॉइंट में किया बदलाव

चेन्नई, 30 अक्टूबर (वार्ता) भारतीय अंतरिक्ष संगठन (इसरो) ने उपग्रह निष्कासन कक्षा में थोड़ा बदलाव करके अपने भारी लिफ्ट रॉकेट एलवीएम3 को रणनीति उपग्रह सीएमएस-03 भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में ले जाने में सक्षम बनाया है।

भारतीय रॉकेट एलवीएम3 दो नवंबर को देश के नवीनतम रक्षा उपग्रह जीसैट-7आर या सीएमएस-03 को ले जाएगा, जिसका वजन लगभग 4.4 टन है। यह उपग्रह भारतीय नौसेना द्वारा महासागर और अन्य स्थानों की निगरानी के लिए उपयोग किया जाएगा। तीन-चरणों वाला एलवीएम3 रॉकेट का वजन 642 टन है और इसकी ऊंचाई 43.5 मीटर है। यह केवल लगभग चार टन जीटीओ और 10 टन निम्न पृथ्वी कक्षा (एलईओ) तक ले जा सकता है।

इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ एस सोमनाथ ने कहा कि अपभू जीटीओ के लिए सामान्य 36,000 किमी की बजाय कम है। उपग्रह को अंतरिक्ष यान के प्रणोदन का उपयोग करके ऊपर उठाया जाएगा, जो अधिक कुशल है। उन्होंने बताया कि यह श्रीहरिकोटा रॉकेट पोर्ट से भारतीय रॉकेट द्वारा लॉन्च किया जाने वाला सबसे भारी संचार उपग्रह होगा।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने इससे पहले भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिए जीसैट-7ए को कक्षा में स्थापित किया था। जीसैट-7 और जीसैट-7ए दो समर्पित सैन्य संचार उपग्रह हैं, जबकि इससे पहले प्रक्षेपित किए गए अन्य सभी पृथ्वी अवलोकन और संचार उपग्रह नागरिक और रक्षा, दोनों उद्देश्यों के लिए दोहरे उपयोग वाले थे।

 

 

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