
रीवा। सतत संघर्ष करते रहने की जिनमें जिद होती है, सफलता उनके कदम चूमती है. आज कई विधाओं में विंध्य के सपूतों ने कठिनाइयों और बाधाओं को पार करते हुए देश में अपनी पहचान स्थापित की है.
उक्त विचार बॉलीवुड के विख्यात कलाकार शांतनु शुक्ला ने डेज सोसायटी द्वारा आयोजित रीवा फिल्म फेस्टो कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए. रीवा से मास्को संबंध की टीम पर आयोजित इस 3 दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिवस जहां शोमैन राजकपूर और ही मैं धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी गई वहीं फिल्म मेरा नाम जोकर की स्क्रीनिंग की गई. विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, रंगकर्मी हिरेंद्र सिंह, मनीष मिश्रा उपस्थित रहे. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शांतनु ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि विज्ञान का विद्यार्थी होने के कारण उनके माता पिता भी चाहते थे कि बेटा डॉक्टर या इंजीनियर बने. यही वजह थी कि उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने कुछ दिन नौकरी भी की लेकिन वे खुश नहीं थे. यही वजह रही कि बनारस स्थित संस्थान में प्रवेश ले अभिनय की शिक्षा ली और फिर मंजिल की तलाश में मुंबई निकल पड़े. मुंबई में एक लंबे अरसे संघर्ष के बाद उन्हें एक टीवी सीरियल में छोटी से भूमिका करने का अवसर मिला. कई कठिनाइयां आई पर उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होने कहा कि नाट्य विधा को भी पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए ताकि युवाओं में शुरू से ही कला के प्रति सोच और समझ विकसित हो. इसके लिए उन्होंने सरकार से इस पर विचार करने की बात कही. शुभारंभ कार्यक्रम में प्रखर सिंह, सुभाष श्रीवास्तव, तेज प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे.
