शुरू होगा कचरे से बिजली बनाने वाला प्रदेश का पहला प्लांट

जबलपुर: हरित जबलपुर की ओर छलांग लगाते हुए नगर निगम जबलपुर ने एक और उपलब्धि हासिल की है। शहर के कचरे से बिजली बनाने वाला मध्यप्रदेश का इकलौता 600 टीपीडी क्षमता वाला कठौंदा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट करीब साल भर बंद होने के बाद शनिवार से शुरू कर दिया जाएगा। 11.5 मेगावाट बिजली प्रतिदिन बनाने वाले इस प्लांट के आवश्यक तकनीकी कार्र पूरे कर लिए गए हैं। टर्बाइन रोटर का इंस्टॉलेशन भी पूरा कर लिया गया है।

वहीं बॉयलर में ड्राई आउट की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके अलावा प्लांट की टेस्टिंग और कमीशनिंंग भी हेा चुकी है। विदित हो कि नगर निगम सीमा क्षेत्र कठोंदा में प्लांट में शहर के कचरे को जलाकर बिजली बनाई जाती है। इस संबंध में निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने नवभारत को बताया कि ऊर्जा उत्पादन की मुख्य प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से शुरू करने के लिए कठौंदा प्लांट के बॉयलर में ड्राई-आउट की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्लांट अपनी अधिकतम क्षमता से बिजली का उत्पादन कर सके इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

2016 में स्थापित किया गया था प्लांट
जानकारी के अनुसार नगर निगम द्वारा प्रदत्त जमीन पर एस्सेल कंपनी ने इस प्लांट को वर्ष 2016 में 178 करोड़ रुपए की लागत से लगाया था जिस वक्त स्वामित्व भी कंपनी का था। कंपनी ने करीब दो साल तक प्लांट के जरिए जमकर कमाई की लेकिन जब शहर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम इस कंपनी के हाथों से छीन लिया गया तो कंपनी के जिम्मेदारों ने प्लांट के संचालन में कोई रूचि नहीं दिखाई और अंत में स्पष्ट मना कर दिया गया कि ये प्लांट अब कंपनी संचालित नहीं करेगी।

जिसके बाद नगर निगम जबलपुर ने इस प्लांट के स्वामित्व को सौंपने दुबई की अवार्डा कंपनी से कुछ महीनों बात हुई और उस वक्त दुबई की कंपनी ने प्लांट को खरीदने में रूचि दिखाई थी लेकिन अंत अंत में कंपनी और नगर निगम के बीच सौदा नहीं जमा और फिर इस प्लांट को बंद कर दिया गया। ये प्लांट विगत 1 साल से शहर में बंद पड़ा हुआ है।
प्रतिदिन 600 टन कचरे की है क्षमता
कठौंदा प्लांट में लंबे समय से काम नहीं होने के चलते वहां शहर भर का काफी अधिक एकत्रित हो चुका है। इस प्लांट की प्रतिदिन की 600 टन कचरे की क्षमता है हालांकि अभी शहर में करीब 400 टन कचरा ही निकल रहा है। अब प्लांट का संचालन नगर निगम की देखरेख में नई एजेंसी के द्वारा किया जाना है।

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