जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने जमीन के बदले रेलवे से नौकरी की मांग वाली याचिका को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि बिना वाजिब कारण देरी से किए गए आवेदन पर राहत नहीं दी जा सकती। जस्टिस विवेक रूसिया एवं जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कैट के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें याचिकाकर्ती की उक्त मांग वाली याचिका निरस्त कर दी गई थी।
टीकमगढ़ निवासी मुकेश यादव ने याचिका दायर कर बताया कि ललितपुर-खजुराहो ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट के लिए पश्चिम मध्य रेल ने याचिकाकर्ता की 0.809 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई थी।
जनवरी 2007 में इसका मुआवजा भी दे दिया गया। पमरे की ओर से अधिवक्ता अर्नव तिवारी ने बताया कि याचिकाकर्ता ने 2010 की एक पॉलिसी के तहत 2017 में जमीन के बदले नौकरी के लिए आवेदन किया, जिसे रेलवे ने निरस्त कर दिया। दलील दी गई कि उक्त पॉलिसी बैकडेट से लागू नहीं की जा सकती। इसके अलावा पॉलिसी लागू होने के 7 वर्ष बाद आवेदन किया गया और देरी का कोई उचित कारण भी नहीं बताया गया। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
