खजुराहो: पर्यटन नगरी खजुराहो के एक स्थानीय होटल में ‘अधिवक्ता परिषद महाकौशल प्रांत’ की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय संगठनात्मक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में महाकौशल प्रांत के सभी 28 जिलों से आए प्रबुद्ध अधिवक्ताओं और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक और न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ समाज में ‘न्याय की पहचान’ को और मजबूत करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
विमानों की तेज आवाज से खजुराहो के मंदिरों को खतरा
बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भारत सरकार के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु (एडवोकेट) ने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर विषय पर सबका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों के ठीक ऊपर से गुजरने वाले विमानों की तेज आवाज और उनका कंपन (Vibration) भविष्य के लिए एक अदृश्य और गंभीर खतरा बन सकता है।
उन्होंने आगाह किया कि हालांकि इसका नकारात्मक प्रभाव वर्तमान में तुरंत दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले 20 वर्षों में इन चंदेलकालीन ऐतिहासिक मंदिरों की नाजुक संरचना को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
खजुराहो में शोध केंद्र की मांग, दायर करेंगे जनहित याचिका
डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु ने धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। उन्होंने पुरजोर शब्दों में कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को खजुराहो में एक अत्याधुनिक शोध केंद्र (Research Center) स्थापित करना चाहिए। उनके अनुसार, खजुराहो और उसका आसपास का पूरा बुंदेलखंड क्षेत्र प्राचीन इतिहास, शोध और संरक्षण कार्यों के लिए देश के सबसे उपयुक्त और समृद्ध स्थानों में से एक है।
उन्होंने बड़ा एलान करते हुए कहा कि इस गंभीर विषय और मंदिरों की सुरक्षा को लेकर वे जल्द ही माननीय न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे। साथ ही वे केंद्र और राज्य सरकार से भी आधिकारिक तौर पर मांग करेंगे कि खजुराहो में अविलंब शोध केंद्र की स्थापना की जाए।
