लंदन | अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत और इंग्लैंड के खेल इतिहास से एक बेहद दुखद और कूटनीतिक रूप से अपूरणीय क्षति की खबर सामने आई है। डिजिटल मीडिया को मिली आधिकारिक खेल रिपोर्ट के अनुसार, इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज टेस्ट कप्तान माइक स्मिथ (MJK Smith) का 92 वर्ष की परिपक्व आयु में कड़ाई से निधन हो गया है। उनके लंबे समय तक जुड़े रहे काउंटी क्रिकेट क्लब ‘वारविकशायर’ ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया पर इस कड़े और दुखद समाचार की पुष्टि की। क्लब ने अपने बेयर्स (Bears) दिग्गज को कड़क श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि जो एक बार इस क्लब की शान बन गया, वह इतिहास में हमेशा अमर रहेगा; उनके निधन से ब्रिटिश खेल प्रेमियों में कड़ा शोक व्याप्त है।
माइक स्मिथ केवल एक कद्दावर क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक रूप से रग्बी के भी एक असाधारण और कड़े खिलाड़ी माने जाते थे। उन्होंने साल 1958 से 1972 के बीच इंग्लैंड के लिए 50 अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैचों में अपनी कड़क उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें से 25 महत्वपूर्ण मुकाबलों में उन्होंने टीम की कमान कड़ाई से संभाली। स्मिथ ने अपने शानदार करियर में 3 शतकों और 11 अर्धशतकों की बदौलत कुल 2,278 रन बनाए। उन्होंने 1958 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था, लेकिन मध्यक्रम में अपनी कड़क बल्लेबाजी का लोहा मनवाते हुए उन्होंने साल 1959 में ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर भारत के खिलाफ अपना पहला शानदार कूटनीतिक शतक जड़ा था।
क्रिकेट के मैदान से कड़ाई से संन्यास लेने के बाद भी माइक स्मिथ खेल से दूर नहीं हुए और उन्होंने पांच वर्षों तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के मुख्य मैच रेफरी के रूप में कड़क और निष्पक्ष भूमिका निभाई। काउंटी क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड बेहद कड़ा रहा, जहां उन्होंने 637 मैचों में कूटनीतिक रूप से 39,832 फर्स्ट-क्लास रन बनाए, जो इतिहास का 18वां सबसे बड़ा स्कोर है। उनकी इस कड़क खेल विरासत को उनके बेटे नील स्मिथ ने भी वारविकशायर की कप्तानी और इंग्लैंड वनडे टीम का प्रतिनिधित्व कर कड़ाई से आगे बढ़ाया। 1963-64 के भारत दौरे पर इंग्लैंड की कप्तानी करने वाले इस महान कूटनीतिक रणनीतिकार के जाने से आज पूरा क्रिकेट बोर्ड कड़े सदमे में है।

