तेहरान, 03 दिसंबर (वार्ता) ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने मंगलवार को कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फिर से शुरू करने में मुख्य बाधा अमेरिका की ‘अत्यधिक माँगे’ हैं। श्री गालिबाफ ने ईरान की राजधानी तेहरान में राष्ट्रीय संसद दिवस के अवसर पर एक संवाददाता सम्मेलन में यह टिप्पणी की, जहाँ उन्होंने अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता को फिर से शुरू करने में आने वाली दिक्कतों पर विस्तार से चर्चा की। अध्यक्ष ने कहा कि अमेरिका बातचीत नहीं करना चाहता, बल्कि उसका उद्देश्य अपनी माँगों को थोपना और ईरान को झुकने के लिए मजबूर करना है। उन्होंने कहा, “यह तब है जब हमने 12 दिवसीय युद्ध (इज़राइल के साथ) के दौरान प्रदर्शित किया कि हम न तो आत्मसमर्पण करते हैं और न ही थोपने को स्वीकार करते हैं।”
श्री गालिबाफ ने अमेरिका की उस माँग की ओर इशारा किया कि ईरान को अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता कम करनी चाहिए। उन्होंने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि ईरान अपनी रक्षा के साथ कोई समझौता नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ अपनी हालिया बातचीत के दौरान अमेरिका ने खुद को ‘षड्यंत्रकारी और झूठा’ साबित किया और वे समस्याओं को हल करने के लिए बिल्कुल उत्सुक नहीं थे, बल्कि तेहरान पर दबाव बनाने और धोखा देने में लगे थे।
अध्यक्ष ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि कैसे फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी ने अगस्त के अंत में ‘स्नैपबैक मैकेनिज़्म’ को सक्रिय कर ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को फिर से बहाल कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यूरोप ने अमेरिका के दबाव में स्नैपबैक को शुरू किया। उन्होंने कहा कि चूंकि यूरोप अमेरिका की बात मानता है, इसलिए अब ईरान के परमाणु मामलों में उसकी (यूरोप) कोई सार्थक भूमिका नहीं रही है। वे अपना स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकते। ईरान और अमेरिका ने इस साल की शुरुआत में ओमान की मध्यस्थता से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पाँच दौर की अप्रत्यक्ष बातचीत की थी और छठे दौर की बातचीत करने ही वाले थे तभी 13 जून को इज़रायल ने ईरान के कई क्षेत्रों पर बड़े हवाई हमले कर दिये थे। अमेरिकी सेना ने भी 22 जून को नतांज, फोर्डो और इस्फ़हान के तीन ईरानी परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी।

