नयागाँव पुल हादसे में एक की मौत तीन की हालत नाजुक

रायसेन। बरेली-पिपरिया मार्ग पर बने नयागांव पुल के अचानक गिरने से हादसे में एक 35 साल के युवक की मौत हो गई। पुल के अचानक गिरने की वजह से ऊपर से जा रही दो बाइक नीचे जा गिरीं, जिसमें बाइक पर सवार एक की मौत हो गई जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। करीब 45 साल पुराना पुल मरम्मत के दौरान अचानक भरभराकर गिर पड़ा। इस दुर्घटना में बरेली के 35 वर्षीय युवक देवेंद्र सिंह धाकड़ की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे की वजह भारी-भरकम ओवरलोड डंपरों का दबाव बताया जा रहा है, जो पुल की जर्जर संरचना झेल नहीं सकी।

घटना सुबह लगभग 10:40 बजे की है, जब पुल के नीचे रिपेयरिंग का काम चल रहा था और ऊपर से लगातार वाहन गुजर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, स्टेशन पिपरिया से आती मां रेवा बस नयागांव बस स्टैंड पर दो छात्राओं को बैठाने के लिए रुक गई। बस का रुकना कई जिंदगियों के लिए वरदान साबित हुआ, क्योंकि बस के दोबारा स्टार्ट होने से पहले ही दो हैवी लोडेड डंपर पुल पर चढ़ चुके थे। डंपरों का वजन इतना अधिक था कि पुल एक झटके में टूटकर 30 फीट नीचे जा गिरा। पुल के ऊपर से गुजर रही एक स्कूटी और एक मोटरसाइकिल सीधे नीचे जा गिरे। मोटरसाइकिल पर सवार देवेंद्र सिंह धाकड़ अपनी बहन की विदाई के बाद घर लौट रहा था। गिरने के दौरान लोहे के सरियों ने उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। इलाज के लिए पहले बरेली सिविल अस्पताल और बाद में भोपाल एम्स ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

अन्य तीन गंभीर घायलों में जगदीश केवट, महेश केवट और देवेंद्र लोधी को भी एम्स रेफर किया गया है। वहीं अवधेश लोधी को मामूली चोटें आई हैं। हादसे के समय पुल के नीचे कुल छह मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें से पाँच सुरक्षित निकल आए।

पुल बरेली–पिपरिया मार्ग पर ऐसे तीन पुराने पुल मौजूद हैं और तीनों ही अपनी क्षमता सीमा पार कर चुके हैं। नर्मदा अंचल में रेत खदानों के कारण भारी-भरकम ओवरलोड डंपरों का लगातार आवागमन होता है, जिससे पुलों पर जोखिम और बढ़ जाता है।

बड़ा सवाल यह है कि जब पुल अत्यंत जर्जर स्थिति में था, तो मरम्मत के दौरान ट्रैफिक डाइवर्ट क्यों नहीं किया गया? सुरक्षा अवरोधक और चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए? और भारी वाहनों को गुजरने की अनुमति किसकी लापरवाही से मिलती रही?

मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल मौके पर पहुंचे

हादसे के बाद मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल मौके पर पहुंचे। मंत्री ने माना कि पुल पर उसकी क्षमता से अधिक भार वाले वाहन चलते रहे होंगे और जांच के निर्देश दिए।

कांग्रेस ने विधान सभा में उठाया मामला

उधर, कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में मुद्दा उठाते हुए कहा कि निर्माण कार्य के बावजूद पुल पर ट्रैफिक नहीं रोका गया और न ही डायवर्जन किया गया, जो गंभीर लापरवाही है। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा कि सड़कों का टूटना और पुलों का गिरना सरकार में भ्रष्टाचार का उदाहरण है। केंद्रीय कृषि मंत्री के क्षेत्र में यह घटना सरकार के सुशासन पर सवाल खड़े करती है।

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