ठंड में हृदय रोगियो की बढ़ी संख्या, प्रतिदिन पहुंच रहे हार्ट अटैक के केस, वार्ड में बेड़ फुल

रीवा। ठंड बढऩे के साथ हृदय रोगियो की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. तो वही सामान्य बीमारी के मरीजो की संख्या भी कम नही हो रही है. ठंड में हार्ट अटैक के केस बढ़ जाते है, इसमे सावधानी बरतने की जरूरत है. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ओपीडी में लगातार भीड़ बढ़ रही है. हालत यह है कि हृदय रोगियो की संख्या ज्यादा होने के कारण वार्ड में बेड़ की समस्या होने लगी है. लिहाजा वेटिंग की स्थित से गुजरना पड़ रहा है.

सुपर अस्पताल के अलावा संजय गांधी अस्पताल के आउटडोर में भी मरीजो की संख्या कम होने का नाम नही ले रही है. सामान्य बीमारी से पीडि़त मरीज यहा पहुंच रहे है, सर्दी जुखाम, पेट दर्द, बुखार के मरीज ओपीडी में पहुंच रहे है. हालाकि अक्टूबर में जिस तरह से स्थित थी उस तरह तो मरीजो की संख्या नही है फिर भी कम नही हो रही है. सोमवार से लेकर शुक्रवार तक सबसे ज्यादा ओपीडी में भीड़ रहती है. ठंड के समय माना जाता है कि मरीजो की संख्या कम होती है लेकिन इस बार ऐसा देखने को नही मिल रहा है. सुपर अस्पताल में बेड़ो की संख्या सीमित है काडियोलाजी विभाग में इस समय मरीजो की संख्या ज्यादा है. जबकि विभाग में कुल 54 बेड़ है. अधीक्षक डा. अक्षय श्रीवास्तव का कहना है कि आने वाले समय में बेड़ बढ़ेगें, इसके लिये प्रक्रिया चल रही है. बेड़ बढऩे के बाद राहत मिलेगी.

अटैक के आ रहे केस

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलाजी विभाग की ओपीडी में मरीजो की संख्या कम होने का नाम नही ले रही है. पिछले पांच दिनो में लगभग 950 मरीजो को देखा गया है और 60 मरीजो को भर्ती किया गया है. हृदय रोगियो की संख्या ठंड के समय बढ़ जाती है. दरअसल नसो की सिकुडने से हृदय तक खून और आक्सीजन पहुंचने में दिक्कत होती है. ऐसे में हृदय को पम्प करने के लिये ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और इस स्थित में हार्ट अटैक, हार्ट ब्लाक और हाटफेल जैसी परेशानियां आ सकती है. ठंड के मौसम में हृदय रोगियो को अपना ख्याल रखना चाहिये. बीपी और सुगर की समय-समय पर जांच करानी चाहिये, ठंड में सावधानी ज्यादा रखने की जरूरत है.

ठंड में विशेष सावधानी बरते

हृदय रोग विशेषज्ञ डा. एस.के त्रिपाठी का कहना है कि बीपी एवं सुगर की शिकायत वालो को नियमित रूप से जांच करानी चाहिये और डाक्टर की सलाह पर ही दवा ले. जिन्हे पहले से हार्ट अटैक आ चुका है, जिनकी हार्ट पंपिंग कम है या फेफड़े में कोई समस्या रही है ऐसे लोग हाईरिस्क में रहते है. ऐसे लोग ठंड से बचने की कोशिश करें, पर्याप्त गर्म पकड़े पहने और जब ज्यादा ठंड हो उस समय बाहर न निकले. साथ ही अपने खान-पान पर भी विशेष ध्यान दें.

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