जबलपुर: 5 साल बीत चुके हैं और देश भर के कैंट बोर्ड के नगरीय निकायों में जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। खबर ये भी सामने निकलकर आ रही है कि कैंट बोर्ड जबलपुर का नगरीय निकायों में विलय की भी प्रक्रिया बहुत धीमी चल रही है ऐसे में कैंट के सिविल एरिया की आबादी की समस्याओं के हल होने में समस्याएं सामने आ रही हैं।
मतलब साफ है कि कैंट बोर्ड में विलय होने या चुनाव होने की बात पर अभी भी मुहर नहीं लगी है। आधिकारिक रूप से अभी कुछ भी कहने से कैंट बोर्ड के अधिकारी बच रहे हैं। हालांकि कुछ दिनों पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ प्रवास के दौरान कैंट के पूर्व बोर्ड मेम्बर्स को आश्वासन दिया था कि चुनाव जल्द कराए जाएंगे। जानकारी के अनुसार आधिकारिक रूप से उच्च कमान के द्वारा ये घोषणा की जानी है कि कैंट बोर्ड का नगरीय निकायों में विलय उचित रास्ता है या फिर कैंट बोर्ड चुनाव कराने का रास्ता ठीक है। फिलहाल ये कह पाना बिल्कुल आसान नहीं है कि ऊंट किस करवट बैठता है।
कुछ की सहमति और कुछ जता रहे विरोध
कैंट बोर्ड जबलपुर की बात करें तो यहां के कुछ पूर्व सदस्य चाहते हैं कि कैंट बोर्ड चुनाव को पूरा कराया जाए वहीं कुछ सदस्य मतदाता सूची में लोगों के नाम काटे जाने का हवाला देकर विरोध के स्वर को बुलंद कर रहे हैं। उधर हिमाचल प्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में चुनाव नहीं कराए जाने की मांग उठने लगी है। वहां के रहवासियों का कहना है कि संपत्तियों से जुड़े मामलों में भारी भरकम टैक्स देने से वे त्रस्त हो चुके हैं यदि ऐसे में रक्षा मंत्रालय से फिर से चुनाव की प्रक्रिया की जाती है तो वे उसका भरपूर विरोध करेंगे।
इसलिए उठ रही मांग
पिछले लंबे समय से कैंट में चुने जाने वाले 8 वार्डों के मेम्बर के चुनाव नहीं हुए हैं। ऐसे में यहां की आबादी की जो समस्याएं होती हैं जैसे पेयजल, सफाई, प्रकाश या निर्माण संबंधी के निराकरण नहीं हो पा रहे हैं। मेम्बर के होने से वे जनता का पक्ष रखते थे और बोर्ड मीटिंग में सकारात्मक निर्णय भी होते थे। लेकिन कैंट बोर्ड सदस्य नही होने से इन सभी समस्याओं को लेकर मेंबर चुनाव कराने की मांग उठने लगी है।
