
– इंदौर और ओंकारेश्वर में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे संघ प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत
इंदौर, 1 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस वर्ष अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। इस उपलक्ष में पूरे देश में वर्ष भर लगातार कार्यक्रम होंगे। इसकी शुरुआत मालवा प्रांत से हो रही है। संघ के मालवा प्रांत में इंदौर और उज्जैन संभाग आते हैं। संघ प्रमुख इंदौर और ओंकारेश्वर में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। प्रमुख कार्यक्रम 3 जनवरी को दशहरा मैदान पर होगा। इस अवसर पर मालवा प्रांत के प्रशिक्षित घोष वादक स्वयंसेवक स्वर शतकम कार्यक्रम के तहत घोष वादन करेंगे। इस कार्यक्रम के लिए 20,000 नागरिकों को निमंत्रित किया गया है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा ताई के नेतृत्व में कार्यरत अहिल्या उत्सव समिति द्वारा इस बार का अहिल्या पुरस्कार अयोध्या राम जन्म भूमि ट्रस्ट के सचिव चंपत राय को दिया जा रहा है। इस पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि भी डॉ मोहन भागवत रहने वाले हैं। इनके अलावा ओंकारेश्वर में मालवा प्रांत के कुटुंब प्रबोधन कार्यक्रम का प्रशिक्षण शिविर चल रहा है उसमें भी संघ प्रमुख हिस्सा लेंगे। ओंकारेश्वर का कार्यक्रम 5 जनवरी को होने वाला है। 3 जनवरी को होने वाले घोष वादन में आरएसएस की संगठन रचना के तहत बने मालवा प्रांत के 28 जिलों के चयनित स्वयंसेवक शामिल होंगे। इंदौर आगमन के बाद 2 जनवरी को सबसे पहले संघ प्रमुख घोष शिविर में शामिल होंगे जो राऊ क्षेत्र के एमराल्ड हाइट्स स्कूल में आहूत हैं।ये शिविर 31 दिसंबर से प्रारंभ हुआ है और शाम से 3 जनवरी तक चलेगा। इसमें संघ रचना के 28 ज़िले के 107 घोष केंद्रों से स्वयंसेवक शामिल होंगे। इस शिविर के लिए बीते 4 महीने से 1150 वादकों द्वारा नियमित अभ्यास चल रहा है। इनमें से 750 से अधिक चयनित वादक इस दशहरा मैदान के प्रकट कार्यक्रम में प्रस्तुति देंगे।
मंदिर और खुदाई विवाद पर संघ प्रमुख की भूमिका पर निगाहें
संघ प्रमुख इंदौर और ओंकारेश्वर में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान इस बात पर निगाहें होंगी कि मंदिर और खुदाई विवाद पर उनकी भूमिका क्या होती है ? संघ प्रमुख ने पिछले जन्म पुणे के कार्यक्रम में कहा था कि हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग खोजना सही नहीं है। कुछ लोग हिंदुओं का नेता बनने के लिए हर मस्जिद की खुदाई करवाने की कोशिश कर रहे हैं। यह गलत है। संघ देश की समावेशी संस्कृति को सुरक्षित करने के लिए कृत संकल्पित है। संघ प्रमुख के इस बयान का संघ परिवार में ही विरोध किया गया। यहां तक कि ऑर्गेनाइज में इसके खिलाफ एक लेख भी लिखा गया। जाहिर है संघ प्रमुख इस विवाद पर क्या भूमिका स्पष्ट करते हैं इस पर निगाहें होंगी।
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