हमीदिया अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण से मरीज की बची जान 

भोपाल। 51 वर्ष के बुजुर्ग मरीज कई दिनों से हमीदिया अस्पताल में किडनी रोग से ग्रसित होने के कारण भर्ती था. जांच में पाया चला कि मरीज की किडनी ने लगभग काम करना बंद कर चुकी है. इस वजह से मरीज की नियमित डायलिसिस पर निर्भरता बढ़ गई. ऐसे समय में जीवनसंगिनी कही जाने वाली मरीज की 46 वर्षीय पत्नी ने प्रेमपूर्वक अपनी एक किडनी देकर पति को नया जीवन दान दिया। ऑपरेशन में सफलता पूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया और मरीज को नया जीवन मिल पाया। हमीदिया की उपलब्धि में यह 11 वां किडनी ट्रांसप्लांट है. जिसे सफलता के साथ पूरा कर लिया गया है. प्रत्यारोपण आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया, जिससे मरीज पर किसी भी तरह का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा. ऐसे में चिकित्सकों ने प्रत्यारोपण का निर्णय लिया। डॉक्टरों के मुताबिक ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और मरीज अब स्वस्थ हैं। प्रत्यारोपण टीम में किडनी रोग विशेषज्ञ, प्रत्यारोपण सर्जन, एनेस्थीसिया विभाग और जूनियर डॉक्टरों की समर्पित टीम शामिल रही। सर्जनों ने बताया कि लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई नेफ्रेक्टॉमी के कारण दाता को जल्दी स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है. इसमें मरीज को दर्द और तकलीफ भी कम होती है. अस्पताल प्रशासन ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे चिकित्सा तंत्र की टीमवर्क का परिणाम है। जो कि डीन डॉ कविता एन के सिंह, अधीक्षक सुनित टंडन के निरंतर सहयोग से सम्भव हो सका है.

टीम में डॉ. हिमांशु शर्मा, डॉ. आर. आर. बड़ई, डॉ. सौरभ जैन,डॉ. अमित जैन,डॉ. समीर व्यास,डॉ. नरेंद्र कुमार,डॉ. आर. पी. कौशल,डॉ. यशवंत धावले,डॉ. बृजेश कौशल,डॉ. श्रेता श्रीवास्तव,डॉ. सौरभ,डॉ. अजय,डॉ. स्कंद,डॉ. अभिषेक,डॉ. शिवम,डॉ. शुभम, डॉ. प्रसून, डॉ. उत्कर्ष, डॉ. शिवासमय, डॉ. अलिफ्या, डॉ. गजेन्द्र, डॉ. सौनू शामिल रहे।

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