जबलपुर: सिहोरा वन परिक्षेत्र के खितौला स्थित नरसिंह मंदिर की धर्मशाला की खाली जमीन पर लगे सागौन के हरे-भरे पेड़ों को दिलेरी से काटा जा रहा था। सागौन के पेड़ों को अनुमति के साथ काटे जाने की खबर क्षेत्र में आग की तरह फैल गई और फिर कुछ ही देर में वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पेड़ों की कटाई को जांच पूरी होने तक रूकवा दिया।
नगर पालिका परिषद् सिहोरा के सीएमओ की अनुमति भारत पटैल नामक व्यक्ति को किस आधार पर दी गई और ये सागौन के पेड़ों को काटकर क्या करने वाला था. ये सवाल अब भी बरकरार है। हालांकि वन विभाग ने इसमें हस्तक्षेप करते हुए जांच शुरू कर दी है।गौरतलब है कि सिहोरा और उसके आसपास के इलाके में लकड़ी माफियाओं का गिरोह पिछले लंबे समय से काम कर रहा है जो कि अंधेरे में बिना अनुमति के कीमती सागौन की लकड़ी को जंगल से काटते हैं और फिर उन्हें बेचते आए हैं। ये सौदा मझगवां, उमरिया और मझौली क्षेत्र में भी लकड़ी की अवैध कटाई कई बार रात के अंधेरे में की जाती है।
28 मई को जारी हुआ था अनुमति का आदेश
डीएफओ ऋषि मिश्रा ने नवभारत को जानकारी देते हुए बताया कि भारत पटैल निवासी जुनवानी द्वारा सागौन की लकड़ी की कटाई की जा रही थी जिसे फिलहाल अभी रूकवा दिया गया है। सागौन की लकड़ी काटे जाने की सूचना पर जब मौके पर वन विभाग की टीम पहुंची तो संबंधित व्यक्ति ने नगर पालिका परिषद् सिहोरा के सीएमओ द्वारा विगत 28 मई 2025 को लकड़ी काटने की दी गई अनुमति का आदेश दिखा दिया।
डीएफओ के अनुसार खितौला स्थित नरसिंह मंदिर की धर्मशाला की खाली जमीन पर अधिकार क्षेत्र रेवन्यू विभाग का है, लेकिन सागौन की तस्करी व शासकीय जमीन पर सागौन की लकड़ी अवैध रूप से काटा जाना पाया गया तो निश्चित ही संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।डीएफओ ऋषि मिश्रा ने स्पष्ट किया कि मामले के तथ्य जुटाकर जांच कराई जा रही है कि सागौन की लकड़ी को काटने की अनुमति किस आधार पर पालिका परिषद् सिहोरा द्वारा दी गई है। परीक्षण के बाद कुछ गड़बड़ी आती है तो संबंधित के खिलाफ गाज गिरना तय माना जा रहा है।
