
नई दिल्ली, 17 नवंबर 2025: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने एक व्यक्ति को ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के नाम पर डरा-धमकाकर कई महीनों तक घर में कैदी बनाकर रखा और उससे करीब ₹32 करोड़ रुपए ठग लिए। यह ठगी 15 सितंबर 2024 को शुरू हुई, जब पीड़ित को डीएचएल कंपनी का कर्मचारी बनकर कॉल आया और उसके पार्सल में ड्रग्स मिलने की बात कही गई, जिसके बाद कॉल को नकली सीबीआई अधिकारी को ट्रांसफर कर दिया गया।
स्काइप पर कैदी बनाकर वसूली
सीबीआई बताने वाले ठग ने पीड़ित को डराया कि सारे सबूत उसके खिलाफ हैं, और यदि उसने पुलिस या वकील से मदद ली तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। डर का माहौल बनाने के बाद, ठगों ने पीड़ित को स्काइप ऐप पर कैमरा ऑन रखकर घर में नजरबंद रहने के लिए कहा। नकली सीबीआई अधिकारी और साइबर क्राइम अधिकारी के नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके जमानत और टैक्स के नाम पर 24 अक्टूबर से 18 नवंबर 2024 तक किस्तों में ₹32 करोड़ की ठगी की गई।
पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के प्रति किया सचेत
जब ठगों ने पैसे वापस नहीं किए और फिर से टैक्स मांगने लगे, तो पीड़ित को शक हुआ और उसने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने पुष्टि की कि यह डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का एक नया तरीका है, जिसमें ठग विदेशी नंबरों, स्काइप और नकली दस्तावेजों का उपयोग करते हैं। पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि सीबीआई या पुलिस कभी भी फोन पर पैसे नहीं मांगती और ऐसी स्थिति में तुरंत परिवार या पुलिस को सूचित करें।
