सुप्रीम कोर्ट का तेलंगाना सरकार, विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय को नोटिस

नयी दिल्ली, 04 मार्च (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने दलबदल कर सत्ताधारी कांग्रेस में शामिल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं पर फैसला करने में देरी के मामले में तेलंगाना सरकार और विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय को नोटिस जारी कर 25 मार्च से पहले अपना जबाव दाखिल करने का मंगलवार को आदेश दिया।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज की पीठ ने यह आदेश पारित करते हुए सवाल किया कि क्या विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने तक यह जारी रहना चाहिए। क्या लोकतंत्र में यह स्थिति विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने तक जारी रहनी चाहिए।

पीठ ने पीठ ने सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल हुए तीन बीआरएस विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में तेलंगाना उच्च न्यायालय के नवंबर 2024 के आदेश के खिलाफ याचिकाओं पर विचार करते हुए पूछा, “अयोग्यता याचिका पर फैसला करने के लिए उचित अवधि कार्यकाल समाप्त होने के बाद होनी चाहिए।”

पीठ ने आगे पूछा, “लोकतांत्रिक सिद्धांतों का क्या हुआ?” जबकि दूसरी याचिका बाकी सात विधायकों के भी दलबदल से संबंधित थी।

पीठ ने प्रतिवादियों में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी से पूछा कि वह अदालत को बताएं कि विधानसभा अध्यक्ष को मामले पर फैसला करने के लिए समय सीमा क्या है। फिर अदालत मामले पर फैसला नहीं करेगी।

पीठ ने कहा, “हर मामले में ऑपरेशन सफल और मरीज की मौत नहीं हो सकती। मैं किसी चीज का जिक्र नहीं कर रहा हूं।”

वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुंदरम याचिकाकर्ताओं के लिए पेश हुए। उन्होंने कुछ प्रतिवादियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के बारे में कहा कि उन्होंने ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि वे जवाब दाखिल नहीं करने जा रहे हैं।

श्री सुंदरम ने पीठ के समक्ष कहा, “तीन तथ्य स्वीकार किए जाते हैं कि अयोग्यता आवेदन मार्च और अप्रैल 2023 में दायर किए गए थे, जहां तक ​​रिट याचिका के अन्य विषय का सवाल है, इसे जून-जुलाई 2024 में दायर किया गया था। एक साल से अधिक समय बीत चुका है, और कुछ नहीं हुआ है।”

इस पर पीठ ने कहा कि उन्हें (प्रतिवादियों) मामले में जवाब दाखिल करने दें।

वरिष्ठ अधिवक्ता सुंदरम ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह दिए जाने का विरोध किया और जोर देकर कहा कि वे मामले में देरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह देरी करने का एक और तरीका है।”

पीठ ने कहा कि सिंघवी और रोहतगी ने कहा कि मामले में कोई औपचारिक नोटिस नहीं था, इसलिए प्रतिवादी जवाब दाखिल नहीं कर सकते।

इस पर पीठ ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपत्ति अति तकनीकी है। हालांकि, हम नहीं चाहते कि बाद में कोई आपत्ति उठाई जाए कि याचिकाओं पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना फैसला किया गया।”

पीठ ने याद दिलाया कि पिछली सुनवाई में उसने रोहतगी से पूछा था कि क्या विधानसभा अध्यक्ष वो समयसीमा बताएंगे, जिसके भीतर मामले पर फैसला किया जाएगा ताकि अदालत कोई आदेश पारित करने से बच सके।

पीठ ने नोटिस जारी कर राज्य सरकार, विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारी, तेलंगाना विधानसभा सचिव, चुनाव आयोग और दलबदलू विधायकों से अगली सुनवाई की तारीख 25 मार्च से पहले जवाब मांगा।

 

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