रीवा: रीवा जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान आज मानवता और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली जिसने पूरे कलेक्ट्रेट परिसर को भावुक कर दिया। सिरमौर जनपद के ग्राम पंचायत गोदहा से एक लाचार पिता अपनी दिव्यांग बेटी रुचि तिवारी को गोद में उठाकर न्याय की आस लिए सीधे कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के पास पहुंचा।
अत्यंत दयनीय स्थिति में पीएम आवास की मांग लेकर आई इस दिव्यांग लड़की की पीड़ा को देखकर कलेक्टर का दिल पसीज गया।कलेक्टर सूर्यवंशी ने तत्परता दिखाते हुए न केवल उनकी शिकायत को पूरी गंभीरता से सुना बल्कि तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए तहसीलदार हुजूर शिव शंकर शुक्ला की सरकारी गाड़ी बुलाई और स्वयं पिता-पुत्री को सम्मान पूर्वक उनके गृह ग्राम भेजने के निर्देश दिए।कलेक्टर की इस मानवीय पहल की पूरे कलेक्ट्रेट परिसर और प्रशासनिक गलियारों में जमकर सराहना हो रही है।
पीएम आवास के नाम पर 2,000 की रिश्वत मांगने का आरोप
जनसुनवाई के दौरान दिव्यांग रुचि तिवारी और उनके पिता ने ग्राम पंचायत गोदहा के रोजगार सहायक पर बेहद गंभीर आरोप लगाए।पीड़ित परिवार ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने और फाइल आगे बढ़ाने के एवज में सहायक सेक्रेट्री द्वारा उनसे 2,000 की रिश्वत की मांग की जा रही है।एक गरीब और दिव्यांग बेटी के परिवार से इस तरह की अवैध मांग की बात सुनते ही कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का पारा चढ़ गया।
कलेक्टर का कड़ा रुख 24 घंटे का अल्टीमेटम
भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता की इस शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों की क्लास लगा दी। उन्होंने जनपद पंचायत सिरमौर और जिला पंचायत के संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए इस मामले की जांच करने और दोषी कर्मचारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने दोटूक लहजे में अधिकारियों को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि इस समय सीमा के भीतर पीड़ित दिव्यांग लड़की को पात्रता अनुसार आवास स्वीकृत किया जाए और आरोपी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
