इस कठिन पिच पर मुझे अंतिम ओवर तक खेलना था : किशन

चेन्नई, 19 मई (वार्ता) जब इशान किशन ने पूरे 20 ओवर विकेटकीपिंग करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को 180 के स्कोर पर रुकते हुए देखा और इसमें अधिकतम योगदान सनराइजर्स हैदराबाद के तेज़ गेंदबाज़ों द्वारा 17 ओवर में डाले गए 39 धीमी गति की गेंदों का था तो उन्हें पता था कि चेज़ करना आसान नहीं होने वाला है। तीसरे ओवर में तीन नंबर पर बल्लेबाज़ी करने आए किशन ने ये सुनिश्चित किया कि वह अंत तक क्रीज़ पर रहेंगे। 47 गेंदों में 70 रन बनाकर जब वह आउट हुए तब एसआरएच को नौ गेंदों में केवल छह रन चाहिए थे। पोस्ट मैच प्रजेंटेशन में किशन ने कहा, “जब मैं विकेटकीपिंग कर रहा था तो मुझे एहसास हुआ कि पिच आसान नहीं है। मुझे लग रहा था कि इस टोटल को भी हासिल करना आसान नहीं होने वाला है क्योंकि पिच इतनी आसान नहीं थी और ख़ास तौर से स्पिनर्स और धीमी गति वाली गेंदें काफ़ी अच्छी निकल रही थी। हालांकि, उसी समय मुझे ये भी लगता है कि तीन नंबर का बल्लेबाज़ होने के कारण मेरा काम मैच का अंत करने की कोशिश करना है। क्योंकि नए बल्लेबाज़ों के लिए सिंगल लेना और उसी समय बड़े शॉट्स लगाना आसान नहीं होता तो मुझे अंतिम ओवर तक खेलते रहना था।”

किशन का इस सीज़न स्ट्राइक रेट 179.48 है, लेकिन इस मैच में उन्होंने 148.93 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए। उन्होंने पारी की शुरुआत में स्पेंसर जॉनसन के एक ओवर में तीन चौके लगाते हुए की और फिर 37 गेंदों में अपना पचासा पूरा किया। 18वें ओवर की शुरुआत में चौथा विकेट गंवाने के बाद एसआरएच को 14 गेंदों में 23 रन चाहिए थे और चेज़ थोड़ी मुश्किल हो रही थी तब किशन ने मुकेश चौधरी को एक छक्का और एक चौका लगाते हुए 12 गेंदों में 13 रनों का आंकड़ा ला दिया। किशन ने कहा, “सोच केवल वहां बने रहे और ख़ुद पर भरोसा करने की थी। कई बार परिस्थितियां जटिल हो जाती हैं, लेकिन हम सभी को पता है कि ऐसे मैच किस तरह जीते जाते हैं क्योंकि आपको अपने ऊपर भरोसा करना होता है। किसी भी समय आप ख़ुद पर शंका नहीं कर सकते हैं। “मैं केवल सब कुछ साधारण रखना चाहता था और जितने अधिक ओवर हो सकें बल्लेबाज़ी करना चाहता था क्योंकि बाएं हाथ का बल्लेबाज़ मौज़ूद होने से गेंदबाज़ों के लिए हर समय अपनी लाइन और लेंथ को सही रख पाना कठिन हो जाता है।”

आठवें ओवर में 56/2 के स्कोर पर किशन और हेनरिक क्लासेन की दाएं और बाएं हाथ की जोड़ी साथ आई और उस समय आवश्यक रन रेट 10 से ऊपर का था। क्लासेन शुरुआत में रक्षात्मक दिख रहे थे, लेकिन उन्होंने अपनी बाउंड्री लगाने की आदत को लंबे समय तक नहीं रोका। भले ही पिच चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन क्लासेन ने सीएसके के स्पिनर्स अकील हुसैन और नूर अहमद पर शुरुआत में ही आक्रमण किया और बीच के ओवरों में टीम को नुक़सान होने से भी बचाया। क्लासेन ने कहा, “शुरुआत में मैंने कुछ गेंदें ब्लॉक कीं, लेकिन फिर मैंने कहा कि मैं इस तरह की क्रिकेट नहीं खेल सकता। मुझे इस विकेट पर भी आक्रामक होना होगा और ये मेरे पक्ष में गया। जिस तरह मैं गेंद को मार रहा हूं उससे काफ़ी संतुष्ट हूं। उम्मीद है कि बचे हुए सीज़न में भी ये जारी रहेगा। उन्होंने कहा,”(पिच) नीची रह रही थी, जब हमने कटर्स और ढेर सारी धीमी गति की गेंदें डाली तो गेंद नीची रह रही थी, लेकिन जब उन्होंने इसे आजमाया तो गेंद स्किड होकर आ रही थी, लेकिन इसका ऊपर-नीचे होना जारी था। यह चेन्नई की अच्छी पिचों में से एक थी जिस पर मैं खेला हूं, लेकिन यह क्रिकेट खेलने के लिए आसान जगह नहीं है।”

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