नयी दिल्ली, 19 मई (वार्ता) बदलती प्रौद्योगिकी और भुगतान के नये विकल्प आने के साथ मझौले और छोटे शहरों में यूपीआई के माध्यम से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी एसबीआई कार्ड द्वार मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक में बढ़ती आय, शहरीकरण में तेजी और उभरते मध्यम वर्ग की बढ़ती आकांक्षाओं ने लोगों के खर्च करने के तरीके को बदल दिया है। यूपीआई अब दैनिक लेनदेन की रीढ़ बन चुका है और यूपीआई के माध्यम से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के अपने आंकड़ों का हवाला देते हुए एसबीआई कार्ड ने बताया कि यूपीआई के जरिये क्रेडिट कार्ड खर्च में तिमाही-दर-तिमाही 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गयी। ग्राहकों ने डिपार्टमेंटल स्टोर एवं ग्रोसरी, यूटिलिटी, ईंधन, परिधान और रेस्टोरेंट जैसे सेगमेंट्स में यूपीआई से क्रेडिट कार्ड भुगतान ज्यादा किये।
रूपे क्रेडिट कार्ड को यूपीआई से जोड़ने से इस बदलाव को और गति मिल रही है, जिससे छोटे शहरों के ग्राहक भी अपने रोजमर्रा के खर्चों के लिए आसानी से क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर पा रहे हैं। एसबीआई कार्ड के लगभग 77 प्रतिशत यूपीआई-एक्टिव क्रेडिट कार्ड ग्राहक छोटे और मझौले शहरों से हैं। यूपीआई आधारित क्रेडिट कार्ड खर्च में उनका योगदान 81 प्रतिशत रहा। कंपनी ने बताया कि ग्राहक अब विभिन्न जरूरतों के लिए अलग-अलग क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना पसंद कर रहे हैं। इसके साथ ही ईएमआई आधारित खर्च में भी साल-दर-साल दहाई अंकों की मजबूत वृद्धि दर्ज की गयी। ग्राहक अब गैजेट्स, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पादों आदि की खरीदारी के लिए ईएमआई विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कीमती वस्तुओं की खरीदारी को किस्तों में चुकाने की यह प्रवृत्ति अब महानगरों से आगे मझौले और छोटे शहरों तक फैल रही है। एसबीआई कार्ड ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 11.86 करोड़ क्रेडिट कार्ड प्रचलन में रहे और 23.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक का क्रेडिट कार्ड खर्च दर्ज किया गया। एसबीआई कार्ड के ग्राहकों का खुदरा खर्च 2025-26 में अब तक के उच्चतम स्तर पर रहा और 3.54 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। इसमें साल-दर-साल 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। कुल खुदरा खर्च में ऑनलाइन खर्च की हिस्सेदारी लगभग 62.5 प्रतिशत रही।

