भोपाल। लिटिल बैलेट ट्रूप के रागबंध सभागार में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित आदर्श नाट्य समारोह के अंतिम दिन एक यादगार प्रस्तुति देखने को मिली। हम थियेटर ग्रुप भोपाल द्वारा सादात भारती के निर्देशन में सआदत हसन मंटो की चर्चित कहानी पढ़िए कलिमा का मंचन हुआ। सभागार में बैठे दर्शक इस नाटक के हर क्षण से गहराई से जुड़े रहे और प्रस्तुति के बाद लंबे समय तक मंच की ओर टकटकी लगाए बैठे रहे जैसे वे इस कथा को आगे भी बढ़ते देखना चाहते हों।
प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता में पूरा मंचन अकेले अभिनेता बालेंद्र सिंह बालू ने संभाला। अकेले कलाकार के रूप में उन्होंने न केवल कथा को जीवंत किया बल्कि अपने भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को भीतर तक प्रभावित कर दिया। उनके हावभाव संवादों की लय और स्थितियों के बीच आने वाले मौन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। सेट को साज सज्जा साधारण रही जो नाटक को और जीवंत रूप दे रही थी सजेस्टिव प्रॉपर्टी का प्रयोग प्रस्तुति को और शक्तिशाली बनाता रहा। निर्देशक सादात भारती ने मंच पर वातावरण रचने में सरलता और गहराई दोनों का संतुलित उपयोग किया। समुदायों के बीच तनाव और जीवन के अंतिम क्षणों में उठने वाले मानवीय प्रश्नों की टकराहट को नाटक ने बड़ी संवेदनशीलता से उकेरा। प्रस्तुति के दौरान कई बार ऐसा लगा जैसे कथा दर्शकों के भीतर उतरकर उन्हें अपने निर्णयों और सामाजिक यथार्थ पर विचार करने को मजबूर कर रही हो।
नाटक की कथा
सआदत हसन मंटो की कहानी पढ़िए कलिमा एक ऐसे व्यक्ति के संघर्ष को सामने लाती है जो जीवन और मृत्यु के बीच की अंतिम दहलीज पर खड़ा है। उसके आसपास फैला साम्प्रदायिक तनाव और भीतर का डर मिलकर उसे कश्मकश में डाल देता है। वह अपने अतीत को टटोलता है और उन परिस्थितियों को समझने की कोशिश करता है जिन्होंने इंसान के भीतर के इंसान को दबा दिया है। कहानी मृत्यु के क्षणों से गुजरते हुए जीवन के अर्थ को पकड़ने की कोशिश करती है और अंत में दर्शक को एक बेचैन प्रश्न सौंपकर आगे बढ़ जाती है।
