“समझदारी से खाया भोजन बनता है औषधि”

“समझदारी से खाया भोजन बनता है औषधि”

भोजनं औषधं भवेत्” — आयुर्वेद का यह सिद्धांत स्पष्ट करता है कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संपूर्ण पोषण का आधार है। सही भोजन यदि गलत समय पर किया जाए, तो वही भोजन शरीर के लिए विष समान प्रभाव भी दे सकता है। इसी मूलभावना के साथ आयुर्वेदिक जीवनशैली में ‘सही समय पर सही भोजन’ को अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

 

 आयुर्वेद और दिनचर्या:

भोजन के तीन मुख्य समय

प्रातःकाल (7 से 9 बजे के बीच)
भोजन: हल्का और पौष्टिक नाश्ता जैसे फल, भुना हुआ मखाना, मूंग दाल का चीला या दलिया।
कारण: इस समय अग्नि (पाचन शक्ति) हल्की होती है, इसलिए भारी भोजन न करें।

 दोपहर (12 से 1 बजे के बीच)
भोजन: दिन का सबसे भारी भोजन करें – दाल, चपाती, सब्ज़ी, चावल, छाछ।
कारण: यह समय ‘पित्त काल’ होता है, जब शरीर की पाचन शक्ति सबसे प्रबल होती है।

संध्याकाल (6:30 से 7:30 बजे के बीच)
भोजन: हल्का और सुपाच्य – खिचड़ी, मूंग दाल, उबली सब्ज़ी, सूप आदि।
कारण: यह समय ‘वात काल’ होता है, अग्नि मंद हो जाती है। भारी भोजन कफ व वात दोष को बढ़ाता है।

🕉️ आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भोजन के 10 नियम:
1️⃣ समय पर भोजन करें:
विलंबित भोजन = मंद अग्नि + अपचन + टॉक्सिन (आम)
भूख लगने पर ही खाएं, भूख से अधिक न खाएं।

2️⃣ शांत और एकाग्र मन से भोजन करें:
तनाव में भोजन = दोषों की वृद्धि
भोजन करते समय टीवी या मोबाइल न देखें।

3️⃣ गर्म और ताज़ा भोजन करें:
बासी या ठंडा भोजन = आमवृद्धि = रोग
गुनगुना खाना अग्नि को सहयोग देता है।

4️⃣ शरीर के अनुकूल आहार:
ऋतु, उम्र, प्रकृति और कार्य के अनुसार भोजन चुने।

5️⃣ भोजन को चबाकर खाएं:
अधपच भोजन आंतों में विषाक्तता पैदा करता है।

6️⃣ भोजन के साथ पानी न पिएं:
भोजन के बाद 1 घंटे तक पानी न पीना उत्तम।
अगर प्यास लगे तो केवल 1-2 घूंट गुनगुना जल।

7️⃣ रात्रि में हल्का भोजन:
कभी भी दूध, दही, मांसाहार, तलभुना रात को न लें।

8️⃣ संगति का विचार:
दूध + नमक, दही + मछली जैसे संयोजन ‘विरुद्ध आहार’ कहलाते हैं। ये त्वचा रोग और एलर्जी के मुख्य कारण हैं।

9️⃣ मौसमी व देशीय भोजन करें:
स्थानीय खाद्य पदार्थ शरीर के लिए अधिक अनुकूल होते हैं।

🔟 भोजन के बाद थोड़ी चहलकदमी:
“भोजन के बाद सौ कदम चलना — सौ औषधियों के बराबर।”
सीधा लेटना या सो जाना दोषकारक होता है।

आयुर्वेद में त्रिदोष और भोजन का सम्बन्ध:
दोष अनुकूल आहार समय अनुशंसित खाद्य
वात शाम गुनगुना, तैलीय व सुपाच्य
पित्त दोपहर ठंडक देने वाला, कम मिर्च-मसाले वाला
कफ सुबह हल्का व गर्म भोजन

गलत समय पर भोजन – संभावित परिणाम
भोजन का समय समस्या
देर रात का भोजन मोटापा, कब्ज, अनिद्रा
जल्दी-जल्दी खाना गैस, अपच
भूख न लगने पर खाना अग्निमंद, आमवृद्धि
भारी नाश्ता सुस्ती, थकान

दिन का उत्तम भोजन चार्ट (आयुर्वेदिक अनुशंसा अनुसार):
समय भोजन
7:30 AM भिगोए हुए बादाम, फल
9:00 AM दलिया/चीला/फलों का रस
12:30 PM चपाती, दाल, सब्ज़ी, चावल, छाछ
4:00 PM हर्बल चाय या फलों का टुकड़ा
6:30 PM खिचड़ी, मूंग दाल सूप या उबली सब्ज़ी

निष्कर्ष:
सही भोजन + सही समय = उत्तम स्वास्थ्य।
आयुर्वेद के अनुसार भोजन करना केवल पेट भरने का कार्य नहीं है, बल्कि यह शरीर और आत्मा को संतुलित रखने का पवित्र क्रियाकर्म है। यदि आप दिनचर्या में समयबद्ध भोजन अपनाते हैं, तो 80% बीमारियों से स्वयं ही बच सकते हैं।

📢 अंतिम मंत्र:
“भोजन ही औषधि है, जब उसे समझदारी से अपनाया जाए!

 

SOURCE ; SOCIAL MEDIA

 

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